मैं एक कवि हूँ ।कविता लिखना और सुनना बहुत अच्छा लगता है ।मैं सेवानिवृत्त वरिष्ठ अध्यापक हूँ मुझें चुटकलें .शायरी .गजल .बहुत अच्छे लगते है ।


Brijmohan Rana तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
9 तास पूर्वी

# आज _ की _ प्रतियोगिता "
# विषय _ सामान "
#विधा _ कविता ***
क्या सामान बिक गया है ,इतने खुश हो रहे हो ।
क्या जमीर को मार कर ,शहनशाह बन रहे हो ।।
क्या ,मानवता मार कर ,दानवता अपना रहे हो ।
क्या सदाचार छोड़ कर ,स्वछंदता अपना रहे हो ।।
क्या अपना जमीर मार कर ,पापाचार कर रहे हो ।
क्या दुसरों की खुशियाँ चुरा कर ,खुश हो रहे हो ।।
क्या गद्दारी कर के ,देश भक्त बन रहे हो ।
क्या दुसरों का सुकून बेच कर ,इतरा रहे हो ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।

अजून वाचा
Brijmohan Rana तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
1 दिवस पूर्वी

** कविता **
** विषय .पराधीन #
डरते है कही बिमार ,हम न पड़ जायें ।
महफिलों में जायें तो ,कहीं रोग न लग जायें ।।
खुली हवा में श्वास लेने ,से धबराने लग गये ।
प्रकृति की गोदी में ,खेलने से कतराने लगे ।।
दोस्तों के गले मिलने ,को तरसने लगे ।
दोस्तो के साथ बैठे ,जमाना हो गया ।।
इस धुंटन से अब ,हम धबराने लगे ।
अपनों से हम ,जुदा हो गये ।।
कोरोना ने हमारा ,सुख चैन लुट लिया ।
कोरोना हमारा खुशीयों ,का खजाना खा गया ।।
दोस्त भी धर ,आने से डरने लगे ।
सब को हम शंका की ,दृष्टि से देखने लगे ।।
खिड़की ,दरवाजे से ,झांक कर देखने लगे ।
गलीयों ,चौहारे ,बच्चों ,की अटखेलियों ,से मर्हुम हो गयी ।।
अब हम अपना चेहरा ,नकाब से ढ़कने लगे ।
हम पशु तुल्य ,पराधीन से हो गये ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।

अजून वाचा
Brijmohan Rana तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
1 दिवस पूर्वी

# आज की प्रतियोगिता "
# विषय .आसमानी "
# कविता ***
जीवन आसमानी,
विस्तृत सा ,
कयी अभिलाषा लिए हुए ,
जीवन के रंगों को महकाता हुआ ,
सबके दिलों में बसता हुआ ,
आनंद के पल लुटाता हुआ ,
प्यार में पागल होता हुआ ,
उमंगों की तरंगों से खेलता हुआ ,
हर पल श्रेष्ठता को पाता हुआ ,
श्रेष्ठतम कहलाता हैं ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।

अजून वाचा
Brijmohan Rana तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी शायरी
2 दिवस पूर्वी

**गजल **
# काफिया .अन् **
# रदीफ .तो होता **
मोहब्बत का एहसास कभी कराया तो होता ।
दिखावा ही सही भरम बनाया तो होता ।।
सदाओं की भटकन फितरत तुम्हारी ।
गर दिल पर नहीं काबू बताया तो होता ।।
जमाने के कहने से मोहब्बत नहीं होती ।
चरागे इश्क दिल में जलाया तो होता ।।
कहते हो ओरों से रिश्ता हमारा ।
कभी आकर हमें भी जताया तो होता ।।

अजून वाचा
Brijmohan Rana तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
2 दिवस पूर्वी

# आज की प्रतियोगिता "
# विषय .जिंदा **
**कविता **
लोग प्यार के खातिर ,जिंदा रहते ।
लोग अपनों के लिए ,जिंदा रहते ।।
लोग अरमानों के खातिर ,जिंदा रहते ।
लोग आशाओं के खातिर ,जिंदा रहते ।।
लोग बच्चों के खातिर ,जिंदा रहते ।
लोग वादें निभाने के खातिर ,जिंदा रहते ।।
लोग स्वाभिमान के खातिर ,जिंदा रहते ।
जो अपने खुद के ,जिगर को मार डालते ।।
वो जिंदा भी मुर्दा ,समान ही होते ।
लोग देश की आन के खातिर ,जिंदा रहते ।।
जिसमें मानवता ही नहीं ,वह इंसान नहीं होते ।
बेइज्जत करने वाले ,दानव ही होते ।।
देश पर बलिदान होने वाले ,सदा जिंदा रहते ।
परोपकार करने वाले ,सदा दुसरों के दिलों में जिंदा रहते ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।

अजून वाचा
Brijmohan Rana तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
3 दिवस पूर्वी

#आज की प्रतियोगिता "
# विषय .वास्तविक "
# छंदमुक्त कविता ***
तेरे से आँख लडाना ,वास्तविक था ।
तेरे पर दिल लुटाना ,वास्तविक था ।।
तेरा प्यार पाना ,वास्तविक था ।
तेरी कजरारी नयनों में बसना ,वास्तविक था ।।
तेरे दिल को एहसास दिलाना ,वास्तविक था ।
वास्तविक प्रेम ही ,अधिक टिकाऊँ होता ।।
बनावटी प्रेम दो चार दिन ,में फुर्र हो जाता ।
प्रेम तो राधाकृष्ण की ,तरह होना चाहिए ।।
प्रेम तो हीर रांझा की ,तरह होना चाहिए ।
प्रेम में आँख रोती है ,दिल तड़पता है ।।
वास्तविक प्रेम तो ,समर्पण माँगता है ।
प्रेम करना कोई ,बच्चों का खेल नहीं यारों ।।
प्रेम सच्चा हो तो ,ईश्वर भी दौडा चला आता है ।
प्रेम करना सच्ची ,इबादत करना ही है ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।

अजून वाचा
Brijmohan Rana तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
4 दिवस पूर्वी

** कविता **
# विषय .फुर्सत नहीं ..
फालतु बातों से ,मुझें फुर्सत नहीं ।
दुसरों की बुराई ,करने से फुर्सत नहीं ।।
अपने मुँह मियाँ मीठु बनने ,से फुर्सत नहीं ।
दुसरों को चैन से नहीं बैठने देने ,की फुर्सत नहीं ।।
दूसरों के धरों में झांकने ,की फुर्सत नहीं ।
परोपकार करने ,की मुझें फुर्सत नहीं ।।
मानवता निभाने ,की मुझें फुर्सत नहीं ।
दुसरों के दिलों में ,बसने की फुर्सत नहीं ।।
ईश्वर भजन ,करने की फुर्सत नहीं ।
अपने आप को ,परखने की फुर्सत नहीं ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।

अजून वाचा
Brijmohan Rana तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
4 दिवस पूर्वी

# आज की प्रतियोगिता "
# विषय .टेढ़ा - मेढ़ा "
# कविता ***
स्वभाव से भले ,टेढ़ा मेढ़ा हूँ ।
पर दुसरों की परवाह ,हर पल करता हूँ ।।
बोलना मुझें ,आता नहीं ,
पर मीठी बोली से ,मन हर लेता हूँ ।
ज्यादा पढ़ा ,लिखा नहीं हूँ ।।
पर परोपकार से ,दिल खुश कर देता हूँ ।
साधारण सा ,कवि हूँ ।।
पर दूसरों के ,दिलों में बसता हूँ ।
सजना धजना ,आता नहीं पर ।।
लेखनी से सबके ,दिल सजाता हूँ ।
मित्रों से ज्यादा ,मिलता नहीं हूँ ।
पर मित्रों को ,कभी नहीं भुलता हूँ ।।
स्वभाव से भले ,टेढ़ा मेढ़ा हूँ ।
पर काम सबके ,पल में आता हूँ ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।

अजून वाचा
Brijmohan Rana तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
5 दिवस पूर्वी

# आज की प्रतियोगिता "
# विषय .झेन "
# कविता ***
निरन्तरता जीवन ,का लक्ष्य होना चाहिये ।
झरने की तरह ,लगातार बहते रहना चाहिए ।।
पानी रुक जाये ,तो मैला हो जाता है ।
वैसी जीवन रुक जाये ,तो बर्बाद हो जाता है ।।
निरन्तर झरते रहना ,ही श्रेष्ठता पाना है ।
जीवन तो चलते ,रहने का नाम ही है ।।
लगातार प्रगति करना ,जीवन का लक्ष्य होना चाहिए ।
कितनी भी तकलीफें आए ,पर कभी हताश नहीं होना चाहिए ।।
लगातार चलने वाला ,ही अपनी मंजिल पाता है ।
झेन जीवन का एक ,उद्देश्य होना चाहिए ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,कवि ,अमदाबाद ,गुजरात ।

अजून वाचा
Brijmohan Rana तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
5 दिवस पूर्वी

शब्द ..
दिल पल में छलनी करें ,दुःख देवे अपार ।
दिखने में छोटे लगें ,धाव देवें गंभीर ।।
तलवार का धाव भर जाये ,इसका धाव सदा हरा रहे ।
मानव का सुख चैन खो जाये ,जीना हो जाए दुश्वार ।।
शब्द का मारा पानी ,भी न मांगे ।
जीवन भर तड़प ,जाये अपार ।।
शब्द को तोल तोल ,कर बोले यारों ।
इसकी महिमा जग ,में बड़ी अपार ।।

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