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Brijmohan Rana तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
4 तास पूर्वी

सुदंर कविता ..
विषय .वतन ...
वतन के वास्ते कुछ कर दिखायें ।
विश्व में इसे महान देश बनायें ।।
दंगे फंसाद सब सदा दूर भगायें ।
मानवता का मधुर नाता सजायें ।।
अनेकता में एकता की खुशबु बिखेरें ।
आपसी रंजीशें सदा दूर भगायें ।।
कर्महीन जो लोग बन गये है ।
उन्हें उन्नति की नयी राह दिखायें ।।
भाई भतीजावाद को दूर भगायें ।
देश में अमन शांति सदा बनायें ।।
आओ सबका दिल सुदंर बनायें ।
देश हित अनमोल सपने सजायें ।।
देश को एकता के सूत्र में पिरोयें ।
राष्ट्र हित एक विचारधारा बनायें ।।
https://www.instagram.com/p/B72sDyXhqHF/?igshid=1b9c2u05bujtm

अजून वाचा
Brijmohan Rana तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
5 तास पूर्वी

सुदंर रचना ...
भुख के खातिर इंसान बिकता हैं ।
धन की लालच से इंसान बिकता हैं ।।
गद्दारों की कमी नही इस देश में ।
अपने स्वार्थ हेतु ईमान बिकता हैं ।।
देश की चिन्ता नही यहाँ किसी को ।
भ्रष्ट ,गद्दारो के आगे देश बिकता हैं ।।
प्रजातंत्र की रक्षा करने चले थे ।
झुठे वादों के आगे स्वाभिमान बिकता हैं ।।
स्त्रीयों को देवी का दर्जा देने चले थे ।
हवस के भेडीयो के आगे इज्जत बिकती है ।।
प्रजातंत्र को मखौल बना दिया हैं ।
भ्रष्ट नेताओं के खातिर देश बिकता हैं ।।
https://www.instagram.com/p/Bu-56Pmg1QG/?igshid=4uxl758mmx93

अजून वाचा
Brijmohan Rana तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
1 दिवस पूर्वी

सुदंर रचना ,तृष्णा ....
तृष्णा का इतिहास निराला ,तृष्णा सब को बहुत ललचाती हैं ।
एक तृष्णा पुरी हो तो ,दुसरी तैयार हो जाती हैं ।।
तृष्णा को आज तक कोई भी जीत न पाया हैं ।
तृष्णा के ही बल पर बडे बडो ने मुंह की खायी हैं ।।
तृष्णा क्यूं पुरी नहीं होती ,ये राज समझ में नहीं आया हैं ।
किसी को धन की तृष्णा ,किसी को पद की तृष्णा ।।
किसी को वैभव की तृष्णा ,किसी को अभिमान की तृष्णा ।
सब को तृष्णा ने धूल चटाई है ,पर कोई उसे छोड न पाया हैं ।।
धरती पर जितने भी प्राणी ,सभी तृष्णा के भुखे हैं ।
तृष्णा की लालच में वो अपराधी बन जाते हैं ।।
अपना यश ,प्रसिद्धि गंवा कर जैल चले जाते हैं ।
तृष्णा की लालच छोडो ,कर्म से नाता जोड लो ।।
कर्म से ही भाग्य बदलता ,सब कुछ पल में पा जाता हैं ।
तृष्णा के भरोसे रहते वो सदा दुःख पाते है ।।
मृग मरीचा सी तृष्णा के आगे औधे मुंह धूल चाटते हैं ।
तृष्णा का इतिहास निराला ,तृष्णा सबको ललचाती हैं ।।
https://www.instagram.com/p/BvtL2UDAI9U/?igshid=ezxch5ber963

अजून वाचा
Brijmohan Rana तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
2 दिवस पूर्वी

सुदंर रचना ...
पिता ...
हमारी जिदंगी में पिता भगवान होता हैं ।
करो उसकी सेवा तो वैकुंठ मिलता हैं ।।
अपने अरमानों को कुचल कर तुमको सजाया हैं ।
कठोर परिश्रम करके तुम्हारे सपने सजाये हैं।।
अंगुली पकड़ कर तुम्हें चलना सिखाया हैं ।
तुम्हारे सपने सजाने दिन रात परिश्रम किया है ।।
तुम्हें पाने के लिए उसने कयी मंदिरो के धंटे बजाये है ।
कयी देवताओं के दर पर जाकर अपना शीश झुकाया है ।।
भुखा रहकर भी तुम्हें पेट भरने एक नेवाला अपने मुंह का दिया हैं ।
कर्ज लेकर भी तुम्हें शिक्षा दिलाई हैं ।।
उसके कयी उपकार अगणित है तुम उसे मत भुला देना ।
संसार में सब कुछ मिल जायेगा पर मां बाप नहीं मिलते है ।।
https://www.instagram.com/p/ByrmEm6lVPI/?igshid=1xxr6okyqc50o

अजून वाचा
Brijmohan Rana तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
3 दिवस पूर्वी

सुदंर हास्य कविता ..
विषय .चाय ।
कलियुग में चाय महारानी की महिमा निराली हैं ।
चाय के दशर्न से आठो धामों के दशर्न हो जाते हैं ।।
चाय के आगे छप्पन भोग भी फीके लगते हैं ।
चाय के बिना सुबह और पुरा दिन सूना सा लगता हैं ।।
चाय के बिना मेहमान नवाजी हो ही नही सकती हैं ।
भगवान के दशर्न सुबह में न हो तो चलेगा ।।
पर चाय देवी के दशर्न जरुर हो जाने चाहिए ।
चाय महारानी के कयी रुप कलियुग में हैं ।।
कड़क चाय ,फीकी चाय ,मीठी चाय ,अदक मसाले वाली चाय इन रुपो में महारानी मिलती हैं ।
चाय की चुस्की का आनंद ओर कही नही मिलता हैं ।।
चाय महारानी सभी जगह मिल जाती हैं ।
इसकी प्रसिद्धि के आगे सबकी प्रसिद्धि फीकी लगती हैं ।।
https://www.instagram.com/p/B3Ja0pHhQO8/?igshid=tzxocvq82j73

अजून वाचा
Brijmohan Rana तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
5 दिवस पूर्वी

सुदंर कविता ..
विषय .अपने ...
अपने तो अपने होते है ।
ये दिल के करीब होते है ।।
बिछड़ने पर बहुत रुलाते है ।
मिलने पर खुब हंसाते है ।।
इनके बिना जग सूना है ।
जीवन कोरी कल्पना है ।।
सुख दुःख में साथ निभाते है ।
परिवार की महिमा बताते है ।।
खुशियों के पल सजाते है ।
दुःख में नयी राह दिखाते है ।।
जीवन की सच्चाई बताते है ।
जीवन की रक्षा करते है ।।
https://www.instagram.com/p/B7pT04lhcDP/?igshid=1moe12ppc86j2

अजून वाचा
Brijmohan Rana तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
6 दिवस पूर्वी

सुदंर रचना ...
विषय .मानव ....
मानव हूँ मानव ही रहने दो ।
मानवता का नाता निभाने दो ।।
भाईचारे के रिश्तें निभाने दो ।
दूसरों के दिलों में सजने दो ।।
सभी की नफरतें दूर करने दो ।
दूसरो के दिलों मे प्रेम गंगा बहाने ,
दो ।।
प्यार के रिश्तें मधुर निभाने दो ।
आँखो आँखो में बात करने दो ।।
परोपकार में तन सजाने दो ।
देश हित कुछ कर गुजरने दो ।।
गद्दारों को मुँहतोड़ जवाब देने दो ।
लेखनी से सबके दिल रिजाने दो ।।
उजड़े हुए गुल खिलाने भी दो ।
रोते हुए के आंसू पौछने भी दो ।।
https://www.instagram.com/p/B7koySUBfrD/?igshid=aa2slgot6yjq

अजून वाचा
Brijmohan Rana तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
1 आठवडा पूर्वी

सुदंर रचना ...
विषय .मानव ....
मानव हूँ मानव ही रहने दो ।
मानवता का नाता निभाने दो ।।
भाईचारे के रिश्तें निभाने दो ।
दूसरों के दिलों में सजने दो ।।
सभी की नफरतें दूर करने दो ।
दूसरो के दिलों मे प्रेम गंगा बहाने ,
दो ।।
प्यार के रिश्तें मधुर निभाने दो ।
आँखो आँखो में बात करने दो ।।
परोपकार में तन सजाने दो ।
देश हित कुछ कर गुजरने दो ।।
गद्दारों को मुँहतोड़ जवाब देने दो ।
लेखनी से सबके दिल रिजाने दो ।।
उजड़े हुए गुल खिलाने भी दो ।
रोते हुए के आंसू पौछने भी दो ।।
https://www.instagram.com/p/B7koySUBfrD/?igshid=152xq8zrp2b7z

अजून वाचा
Brijmohan Rana तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
1 आठवडा पूर्वी

सुदंर कविता ..
शब्द .मटका ।
गर्मी में प्राणों से भी प्रिय ठंडा पानी लगता हैं ।
हर प्राणी गर्मी में अपनी प्यास बुझाने लालायित रहता हैं ।।
लाख फ्रिज का पानी पियो पर मटके के जल की तुलना नहीं हो सकती हैं ।
मटका हमें खुद ठंडा होकर शीतल जल देता हैं ।।
मटाका सर्दीयों की मिट्टी से बना हो तो बहुत ठंडा रहता हैं ।
मटके की कहानी भी निराली है ,वह कयी कठीन परिस्थितियों का सामना करता हैं ।।
मटाका हमें शिक्षा देता हैं कि हर परिस्थिति में मटके की तरह ठंडा रहना चाहिए ।
जो अपने मन को ठंडा व मधुर होता हैं वही सबको प्यारा लगता हैं ।।
मटका सब सहन करके भी शीतल जल से मन आनंदित कर देता हैं ।
हमें भी अपने अच्छे स्वभाव से सबके दिल़ो को ठंडा कर देना चाहिए ।।
https://www.instagram.com/p/Bxb4NpGg8bi/?igshid=xmqo0qk2a9rm

अजून वाचा
Brijmohan Rana तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
1 आठवडा पूर्वी

सुदंर रचना ..
फूल सी है नाजुक वो ,सब के दिल को महका जायें ।
चाँद सी सुदंर हैं वो ,सब की आँखों में बस जायें ।।
प्रेम सी है मूरत है वो ,सबके दिलों में समा जायें ।
भाई की जाया है वो ,सबके मन को अति हरषायें ।।
माँ की लाड़ली है वो ,सब ओर अति छा जायें ।
पिता की प्यारी है वो ,सब ओर उजाला कर जायें ।।
संस्कारों की देवी है वो ,एक पल में हाजिर हो जायें ।
राखी बांध कर वो ,अपना रिश्ता निभा कर जायें ।।
प्राणों सी प्यारी है वो ,जुदा होने पर रुला जायें ।
एक पल दूर हो तो वो ,अपनी याद दिला जायें ।।
कभी कुछ नही मांगे वो ,हर पल आशिष दे जायें ।
विधाता की अनमोल कृति है वो ,कभी दिल से दूर न हो पाये ।।
https://www.instagram.com/p/B10VsPqF0TG/?igshid=45pkwwdl3ytm

अजून वाचा