अजीब ये वारदात हो गई, जिंदगी से फिरसे आज मुलाकात हो गई।।


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10 महिना पूर्वी

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हम दोनों ने 18 की उम्र में घर छोड़ा,तुमने JEE पास की मेने Army के लिए Test पास की तुम्हे IIT मिली,मुझे Army तुमने डिग्री हांसिल की,मेने कठोर प्रशिक्षण,तुम्हारा दिन सुबह 7 से शुरू होकर शाम 5 खत्म होता मेरा सवेरे 4 बजे से रात 9 बजे तक और कभी कभार 24 घंटे...तुम्हारी कनवोकेशन सेरेमनी हुई,मेरी नियुक्ति हुई,सबसे बेहतर कंपनी तुम्हे लेकर गयी और सबसे शानदार पैकेज मिला,मुझे कंधो पर regiment ke naam के साथ पलटन ज्वाइन करने का आदेश मिला,तुम्हे नोकरी मिली,मुझे जीने का तरीका,हर सांझ तुम परिवार से मिलते,मुझे उम्मीद रहती की जल्द मिलूँगा,तुम हर त्यौहार उजाले और संगीत में मनाते,मैं अपने commander संग बंकर में,हम दोनों की शादी हुई.....तुम्हारी पत्नी रोज तुम्हे देख लिया करती,मेरी पत्नी बस मेरे जिन्दा रहने की आस करती,तुम्हे बिजनेस ट्रिप पर भेजा गया,मुझे लाइन ऑफ़ कण्ट्रोल पर भेजा गया,हम दोनो लोटे ......हम दोनों की पत्नियां आंसू नहीं रोक पाई....लेकिन....तुमने उसके आंसू पोंछ दिए,मैं नहीं पोंछ पाया,तुमने उसे गले लगा लिया,मैं नहीं लगा पाया,क्यूंकि मैं एक तिरंगे में लिपटे हुए कॉफिन के अन्दर छाती पर मैडल लेकर लेटा हुआ था,मेरे जीने का तरीका ख़त्म हो गया.....तुम्हारी नोकरी जारी है....हम दोनों ने 18 की उम्र में घर छोड़ा इस लेख ने हमें रुलाया सीना गर्व और मन ग्लानि से भर आयाइस माटी की खातिर न जाने कितनो ने अपना चिराग गंवाया

मेरे सभी फोजी भाइयो के लिए वंदे मातरम जय हिंद..
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अजून वाचा
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10 महिना पूर्वी

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10 महिना पूर्वी

please Bhagwan ye jaldi se thik ho jaye ....

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11 महिना पूर्वी

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आर्मी कोर्ट रूम में आज एक केस अनोखा अड़ा था!

छाती तान अफसरों के आगे फौजी बलवान खड़ा था!!

बिन हुक्म बलवान तूने ये कदम कैसे उठा लिया?

किससे पूछ उस रात तू दुश्मन की सीमा में जा लिया??

बलवान बोला सर जी! ये बताओ कि वो किस से पूछ के आये थे?

सोये फौजियों के सिर काटने का फरमान कोन से बाप से लाये थे??

बलवान का जवाब में सवाल दागना अफसरों को पसंद नही आया!

एक बोला बलवान हमें ऊपर जवाब देना है!

और तेरे काटे हुए सिर का पूरा हिसाब देना है!!

तेरी इस करतूत ने हमारी नाक कटवा दी!

अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में तूने थू थू करवा दी!!

बलवान खून का कड़वा घूंट पी के रह गया!

आँख में आया आंसू भीतर को ही बह गया!!

बलवान बोला साहब जी गाँव का गवार हूँ बस इतना जानता हूँ!

कौन कहाँ है देश का दुश्मन सरहद पे खड़ा खड़ा पहचानता हूँ!!

सीधा सा आदमी हूँ साहब! मै कोई आंधी नहीं हूँ!

थप्पड़ खा गाल आगे कर दूँ मै वो गांधी नहीं हूँ!!

अगर सरहद पे खड़े होकर गोली न चलाने की मुनादी है!

तो फिर साहब जी! माफ़ करना ये काहे की आजादी है??

सुनों साहब जी! सरहद पे जब जब भी छिड़ी लडाई है!

भारत माँ दुश्मन से नही आप जैसों से हारती आई है!!

ज्यादा कुछ कहूँ तो साहब जी दोनों हाथ जोड़ के माफ़ी है!

दुश्मन का पेशाब निकालने को तो हमारी आँख ही काफी है!!

और साहब जी एक बात बताओ!

वर्तमान से थोडा सा पीछे जाओ!!

भरे गले से तीसरा अफसर बोला बात को और ज्यादा न बढ़ाओ!

उस रात क्या- क्या हुआ था बस यही अपनी सफाई में बताओ!!

भरी आँखों से हँसते हुए बलवान बोलने लगा!

उसका हर बोल सबके कलेजों को छोलने लगा!!

साहब जी! उस हमले की रात, हमने सन्देश भेजे लगातार सात, हर बार की तरह कोई जवाब नही आया!

दो जवान मारे गए पर कोई हिसाब नही आया!!

चौंकी पे जमे जवान लगातार गोलीबारी में मारे जा रहे थे!

और हम दुश्मन से नहीं अपने हेडक्वार्टर से हारे जा रहे थे!!

फिर दुश्मन के हाथ में कटार देख मेरा सिर चकरा गया!

गुरमेल का कटा हुआ सिर जब दुश्मन के हाथ में आ गया!!

फेंक दिया ट्रांसमीटर मैंने और कुछ भी सूझ नहीं आई थी!

बिन आदेश के पहली मर्तबा सर! मैंने बन्दूक उठाई थी!!

गुरमेल का सिर लिए दुश्मन रेखा पार कर गया!

पीछे पीछे मै भी अपने पांव उसकी धरती पे धर गया!!

पर वापिस हार का मुँह देख के न आया हूँ!

वो एक काट कर ले गए थे मै दो काटकर लाया हूँ!!

इस ब्यान का कोर्ट में न जाने कैसा असर गया?

पूरे ही कमरे में एक सन्नाटा सा पसर गया!!

पूरे का पूरा माहौल बस एक ही सवाल में खो रहा था!

कि कोर्ट मार्शल फौजी का था या पूरे देश का हो रहा था....?????????

अजून वाचा
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11 महिना पूर्वी

*संबन्ध बेशक एक हो*
*लेकिन ऐसा हो,*

*जो अलफाज से ज्यादा*
*खामोशी को समझें*......

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11 महिना पूर्वी

माँ वो नोट बुक है,
जिसमे औेलाद सब कुछ लिख सकती है,
लेकिन माँ सिर्फ प्यार लिखती है।....

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11 महिना पूर्वी

एक उम्र गुजार दी मैंने जिनका जीवन सवारने में,
आज मेरी उस औलाद से मेरा बुढ़ापा उठाया नही जाता..

Aakhir aisa kyu hota hai jeen maa baap ne apna sab kuch war diya apni aulad pe. jab unki Bari aayi to chod diya maa baap Ko uske haal pe .jin ko samaj me apne man saman ki padi hai wo maa baap Ko old age home nahi bhejte ha par unko ye aehsaas jaroor karvaya jata hai ki wo sirf bojh hai unpar ...mana ki budhaape me wo bachhe jaise ho jaye hai ..to kya hua kya hum khayal nahi rakh sakte jaise wo bchapan me rakhte the hamara ...agar unhone hume Bachpan me apne haal pe chod diya hota to kya hota ... To kya hum aaj yaha pe hote ..ye sawal mere un sabhi aulado se hai ....jo maa baap ko old age home to nahi bejte par ha ek zillat bhari life jaroor dete hai .... ????

अजून वाचा
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11 महिना पूर्वी

Agar rishte dil se hona to sabdo ki jaroort nahi hai ...jaise maa ka apni aulad se hota hai ..jo bin kahe hi samj jaati hai ... Maa.....

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11 महिना पूर्वी

Kya hum jo jaisa hai use usi ke sath accept nahi kar sakte .koi perfect nahi hota ..sab me koi na koi weak point hota hai ..kuch khamiya hoti hai use usi ke sath nahi apna sakte kya ..unse change hone ki umeed kyu rakhte hai..ab hai to hai khamiya bahot khamiya hai to ab kya kre... Weak points hai to hai ab kya kre.....

अजून वाचा
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11 महिना पूर्वी

maa to maa hoti hai jahe Insan ki ho ya inki ?? ho ..subah se pareshan hai iss ki maa ab usse kon samjaye uske bachhe mar gye kab se dhund rahi hai Apne bachho Ko ....