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Nimisha तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी शायरी
2 दिवस पूर्वी

आशियाने तो और भी थे मगर,जलाने को
उसे मेरा आशियां ही पसंद आया।।
~✍️ निमिषा~

Nimisha तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
3 दिवस पूर्वी

कभी हस हस के रोता है।
कभी रो रो के हंसता है।।
मुझको भूल जाने की ,वो
कोशिशें नाकाम करता है।।
©निमिषा

अजून वाचा
Nimisha तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी धार्मिक
4 दिवस पूर्वी

सिंहवाहिनी, सिद्धि दायनी।
ममतामय तू वर प्रदायनी।।
जग के संकट हरने वाली।
दुष्टों को भय देने वाली।।
धूम्र विलोचन नैनों वाली।
कृपा दृष्टि बरसाने वाली।।
तू महामायी,जग कल्याणी।
विपदा पल में हरने वाली।।
शत शत नमन करे ये "निमिषा"
पूरन कर दो सबकी इच्छा।।
©निमिषा

अजून वाचा
Nimisha तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी शायरी
6 दिवस पूर्वी

गमों से बात होती है।
बेफिक्री में हर बात होती है।।
बड़े काम की होती हैं तनहाइयां।
यहां खुद से मुलाक़ात होती है।।
~✍️निमिषा~

अजून वाचा
Nimisha तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी शायरी
7 दिवस पूर्वी

मर्ज ए इश्क का शिफा कोई तबीब न कर सका।
तमाम उम्र गुजर गई कोई हबीब न मिल सका।।
~✍️निमिषा~

Nimisha तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी शायरी
1 आठवडा पूर्वी

हमनवां, हमसाया,हमराज बनो।
मैं कहूं न कहूं मेरे सरताज बनो।।
धडकनों को न रहे शिकायत।
कुछ देर मेरे पास रहो।।
~✍️ निमिषा~

अजून वाचा
Nimisha तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी शायरी
1 आठवडा पूर्वी

हसरतों में कुछ ऐसा मुकाम आया।
ना हम मर सके ना कोई साथ आया।।
~✍️निमिषा~

Nimisha तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी शायरी
1 आठवडा पूर्वी

ज़माने की बेरुखी की आदत सी हो गई।
तन्हा थी ज़िन्दगी तन्हा ही रह गई।।
~✍️निमिषा~

Nimisha तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी शायरी
2 आठवडा पूर्वी

मासूम वो हैं या उनके अल्फ़ाज़, खुदा जाने।
इश्क़ है या रश्क हमसे ये तो, खुदा जाने।।
इबादत में उठते हैं हाथ जब भी, मांगती हूं उसको।
मुक्कमल होगी या नहीं ये मुराद, खुदा जाने।।
~✍️निमिषा~

अजून वाचा
Nimisha तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
2 आठवडा पूर्वी

अभिमन्यु
रक्त भानु सा चमक रहा था।
वो वीर बड़ा मनहारी था।।
नाम अभिमन्यु अर्जुन सुत।
उत्तरा का प्रियतम प्यारा था।।
था चला भेदने चक्रव्यूह जो
रच कौरवों ने डाला था।।
रहो यशस्वी युगों युगों तक।
कृष्णा से आशीष पाया था।।
लिखने शौर्य की अप्रितम गाथा।
चला वीर अभिरामी था।।
फंस गया कौरवों की कुटिल चाल में।
निष्प्राण हुआ वो रणभूमि में।
थी उम्र जो हंसने गाने की।
उत्तरा का साथ निभाने की।।
उस उम्र में कर गया नाम अमर था।
लाल सुभद्रा का अति प्यारा था।।
© निमिषा ।

अजून वाचा