किती सांगायचंय तुला ( पर्व पहिले) बुक published on अमेझॉन kindle...



वो महफिल में शामिल हैं,
शौकिन ए इश्क के हस्तियों की चाहत में..
हम तकते रहे मासूम से चेहरे को उनके,
इक प्यार भरी नजरो से दीदार ए हसरत में..
शौक था उन्हें मोहब्बत से ज्यादा महफिलों का
छोड़ आए उस हसीन चेहरे को उसी महफिल में,
क्युकी वो शौक से इंसान को परखने का शौक रखते हैं,
हम इंसान को इंसानियत से परखने का शौक रखते है.. ❤️

-©प्रियंका अरविंद मानमोडे

अजून वाचा

सपने कभी अपने हैसियत से ऊंचे नही देखने चाहिए..
क्युकी जब टूटते है ना तब आवाज नही होती,
पर उसकी गूंज आखरी सांस तक रहती है..

-©प्रियंका अरविंद मानमोडे

अजून वाचा

वादे तेरे कितने हसीन थे,
बस पल दो पल में टूट गए..
हमने जिंदगी भर मनाने के ख्वाब देखे,
आप इतने मे ही रूठ गए..💔

-©प्रियंका अरविंद मानमोडे

अजून वाचा

बरसो बाद उन्होने हमसे खैरियत पूछी,
हम ने मुस्कुराके कह दिया...
टूटकर बिखरे हुए काच से कभी खैरियत नहीं पूछा करते..

-©प्रियंका अरविंद मानमोडे

अजून वाचा

रिश्तों की दहलीज ने हमे इस मोड़ पे लाकर खड़ा कर दिया है,
जहा से ना अपनो के पास जा सकते हैं..
और ना गैरों को अपना बना सकते हैं..

-©प्रियंका अरविंद मानमोडे

अजून वाचा

तिळ गुळ खाऊन खोटं खोटं गोड बोलण्यापेक्षा क्वार्टर व चकणा घेऊन मनात जे येईल ती बोलणारी माणसं जास्त खरी व गोड असतात😘🤭
मकर सक्रांतीच्या हार्दिक शुभेच्छा 🙏

अजून वाचा

कुछ रिश्ते ऐसे बन जाते है,
की छुड़ाए नहीं जाते..
और कुछ ऐसे बन जाते है,
की निभाए नहीं जाते..

-©प्रियंका अरविंद मानमोडे

अजून वाचा

इक मुस्कुराहट आपकी
हर गम को भुला देती है..
वो प्यार भरी नज़रे
हर बार खुदको भुला देती है..
हम कायल है हुस्न से ज्यादा आपके अदाओं के..
हर अदा आपकी हमे
दिवाना बना देती है..❤️

शुभ रात्रि 🙏

-©प्रियंका अरविंद मानमोडे

अजून वाचा

हर कदम पर ठोकरें खाके चलना सीखा है हमने,
और लोग आजकल हमे पत्थरो का डर दिखाते है..

-©प्रियंका अरविंद मानमोडे

अजून वाचा

ओळख बनवायला एक क्षण पुष्कळ असतो..
पण तीच ओळख इतरांच्या मनात कायम ठेवायला अख्खे आयुष्य कमी पडते..☺️

शुभ सकाळ...🙏

-©प्रियंका अरविंद मानमोडे

अजून वाचा