Hey, I am on Matrubharti!



*कपड़े से छाना हुआ पानी*
*स्वास्थ्य को ठीक रखता हैं।*
*और...*
*विवेक से छानी हुई वाणी*
*सबंध को ठीक रखती हैं॥*
*शब्दो को कोई भी स्पर्श नही कर सकता..*_
_*....पर....*_
_*शब्द सभी को स्पर्श कर जाते है*
*🌹सुप्रभात🌹*

अजून वाचा
Shilpi Saxena_Barkha_ तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी प्रणय
1 महिना पूर्वी

इश्क

धड़कनों में धड़कता हूँ,
साँसों में महकता हूँ,
आँखों में बसकर,
सपनों में दिखता हूँ
मुस्कान में खिलता हूँ,
आँसुओं में बहता हूँ,
सिसकियों में रह कर,
तन्हाईयों में सिसकता हूँ,
हाँ...हाँ इश्क हूँ मैं जो,
खुशी में पलता हूँ और दर्द में ढलता हूँ।

✍🏻शिल्पी सक्सेना

अजून वाचा
Shilpi Saxena_Barkha_ तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी शायरी
1 महिना पूर्वी

बारिश में भीगी हुई
दिसम्बर की ये सर्द सुबह
तुम्हारी बातें तुम्हारी यादें
तुम्हारा ग़म
और उसमें भीगे हुए हम

शिल्पी सक्सेना

अजून वाचा

जिन्दगी की तपिश को
सहन कीजिये......!

अक्सर वे पौधे मुरझा
जाते हैं, जिनकी
परवरिश छाया में होती
हैं ....!"
सुप्रभात

अजून वाचा
Shilpi Saxena_Barkha_ तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
1 महिना पूर्वी

देह की देहरी


क्यों निगाहें तुम्हारी
मेरे जिस्म को भेदती हैं
क्यों हमेशा मेरे बदन के
उतार चढ़ाव देखती हैं।

क्यों बार बार निगाहों से
तुम हमें बेपर्दा करते हो
क्यों हर बार निगाहों से ही
तुम मर्यादा पार करते हो।

उड़ना चाहें तो तुम
नोच लो पंख हमारे
किसने दिया अधिकार तुम्हें
कि तुम छीन लो हमारे सपने सारे।

जीवन दिया जिसने तुमकों उसके लिये
तुम अपनी सोच एक बार तो देखो
पूजा में जिसके पाँव तुम पूजते हो
फिर क्यों उसके जिस्म को तुम नोंचते हो।

तुम पुरुष हो तो
है तुम्हें गुरूर कितना
क्या स्त्री को खुल के जीने का
नहीं अधिकार भी इतना।

समझ के उसको इंसान तो देखो
देकर उसको सम्मान तो देखो
देख सको जो कभी तो तुम
देह की देहरी के पार तो देखो।

✍🏻शिल्पी सक्सेना

अजून वाचा

ज़िन्दगी हमसे कुछ छीन लेती है तो साथ ही बहुत कुछ देती भी है। फर्क हमारे नज़रिये का है कि हम आधा गिलास ख़ाली देख़ते हैं या आधा गिलास भरा हुआ देखते हैं ।
शिल्पी सक्सेना

अजून वाचा