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Shilpi Saxena_Barkha_ तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
7 दिवस पूर्वी

कैद है मेरा प्यार तेरी
कसमों की बंदिशों में
रूके हुए हैं मेरे पाँव तेरे
आँसुओं की जंजीरों में
ठहरे हुए हैं मेरे जज्बात
इन अल्फ़ाज़ों के दायरे में
दफन है मेरी मोहब्बत
तुझसे किये उस वादे में
मजबूर है...हम बहुत मजबूर
कि कह भी नहीं सकते
कि तुम और सिर्फ तुम ही हो
मेरे दिल की गहराइयों में

✍🏻शिल्पी सक्सेना

अजून वाचा
Shilpi Saxena_Barkha_ तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
1 महिना पूर्वी

बस....तुम नहीं हो

कुछ भी तो बिखरा हुआ नहीं है
बहुत करीने से सजी है ज़िन्दगी मेरी
एक कोना खाली है और
बस....तुम नहीं हो।

मुस्कुराती हैं सुबहें, गुनगुनाती है रातें
गुमसुम सी हैं शामें और,
बस....तुम नहीं हो।

मचला है मन, महकी हैं सांसें
गुमसुम सी है धड़कनें और
बस....तुम नहीं हो।

बिखरे हैं रंग, फैली है खुशी
गुमसुम सी है हँसी और
बस....तुम नहीं हो।

बरसी है बारिश, भीगा है मन
गुमसुम से हैं हम....
बस....तुम नहीं हो।

©️®️
✍🏻शिल्पी सक्सेना

अजून वाचा

*कपड़े से छाना हुआ पानी*
*स्वास्थ्य को ठीक रखता हैं।*
*और...*
*विवेक से छानी हुई वाणी*
*सबंध को ठीक रखती हैं॥*
*शब्दो को कोई भी स्पर्श नही कर सकता..*_
_*....पर....*_
_*शब्द सभी को स्पर्श कर जाते है*
*🌹सुप्रभात🌹*

अजून वाचा
Shilpi Saxena_Barkha_ तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी प्रणय
7 महिना पूर्वी

इश्क

धड़कनों में धड़कता हूँ,
साँसों में महकता हूँ,
आँखों में बसकर,
सपनों में दिखता हूँ
मुस्कान में खिलता हूँ,
आँसुओं में बहता हूँ,
सिसकियों में रह कर,
तन्हाईयों में सिसकता हूँ,
हाँ...हाँ इश्क हूँ मैं जो,
खुशी में पलता हूँ और दर्द में ढलता हूँ।

✍🏻शिल्पी सक्सेना

अजून वाचा
Shilpi Saxena_Barkha_ तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी शायरी
7 महिना पूर्वी

बारिश में भीगी हुई
दिसम्बर की ये सर्द सुबह
तुम्हारी बातें तुम्हारी यादें
तुम्हारा ग़म
और उसमें भीगे हुए हम

शिल्पी सक्सेना

अजून वाचा