बहुत सारी कहानियों कविताओं के बीच आया हुँ।। लेखकों को जानकर उनसे बात करके उनकी सृजन पृक्रिया को जानना आनंद देता है।।


Shirish Sharma तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
1 आठवडा पूर्वी

वो महबूब गलियां
वो सड़कें
नुक्कड़
दरख्त
दरिया- वरिया
ख्वाब में
मुसलसल
आने
लगे हैं सब
गो कि
जानते हों
हमारा मिलना
ना होगा
अब

-- Shirish Sharma

https://www.matrubharti.com/bites/111406600

अजून वाचा
Shirish Sharma तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी नृत्य
2 आठवडा पूर्वी
Shirish Sharma तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
2 आठवडा पूर्वी

ढेर सारे दिन


ऊन सभी दिनों मे
जब हम साथ नही थे,
तुम्हारी आवाज़ मेरे कानों तक नही आ रहि थी,
और मेरे शब्द तुम तक नही पहुंच पा रहे थे।
उनमें से हर दिन ,
मैं तुम्हारे साथ होना चाहता था,
पर ऐसा ना हो पाया
यूं तो वजहों मे नही जाता मैं,
पर ज़िन्दगी ने घेर लिया था मुझे ,
तुम ही कुछ कह दो इसका इन्तज़ार तो था ही,
तुम्हारी ना झेलने की हिम्मत भी ना जुटा पाया।
अब, और रुकना नही है,
ना कोई इन्तज़ार ना झिझक,
बस साथ चलने और चलते रहने का इरादा।।
साथ ना होने के वो सारे दिन,
जब,
तुम्हारी कमी,
बहुत गहरे से खली
हर दिन ,
लगातार-बारबार।।
ऊन ढेर सारे दिनों में,
तुम्हे कहने की सोचता रहा,
कि ,
आओ उस फ्रेम को भर दो
जिसमे
सिर्फ तुम्हारी तस्वीर ही फबेगी।

अजून वाचा
Shirish Sharma तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
2 आठवडा पूर्वी

ये ना समझना कि अनजान हूँ तुम्हारे घर से
तुम्हारे घर का हर शीशा अल्हड़पन है मेरा जो तुम्हे सारा दिन छेड़ता है
फर्श जिसपे तुम चलती हो ये मेरे कान हैं जो तुम्हारे क़दमों की आहट पहचानते हैं
चूड़ियां जो तुम्हारे हाथों में बजती हैं
ये मेरे लिए ही तो खनकती हैं
लाली जो तुम्हारे होठों पे रचती हैं
ये मेरे लिए ही तो सजती है
तुम्हारे माथे पे लगी बिंदी
मेरा काम ही तो करती है

बुरी नज़रों को तुमसे दूर रखती है
तुम्हारी मुसकान राज़दार है मेरी
हर पल तुम्हारे मन की चुगली मुझसे करती है
तुम्हारे अलग - अलग पेन्डेन्ट जो तुम्हारे सीने से लटकते हैं

ये
छोटे - छोटे दिल हैं मेरे जो तुम्हारे दिल के साथ धड़कने को आपस में लड़ते हैं
ये न समझना कि मैं अनजान हूँ तुम्हारे घर से
सारे बल्ब.... ये तुम्हारा चेहरा रोशन करने के लिए कहे पे ही तो जलते हैं

अजून वाचा
Shirish Sharma तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
4 आठवडा पूर्वी
Shirish Sharma तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी शायरी
1 महिना पूर्वी
Shirish Sharma तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी शायरी
1 महिना पूर्वी

चमकीले पैराहान सबके चेहरों पे मुस्कान टँगी
इन खुशियों के बदले जाने किसकी गिरवी कितनी ज़मीं

कभी मेरी नज़र से देख खुद को आईने में,
देख कर सुरत अपनी तू खुद ही शर्मा जाएगा,
कभी ले नाम अपना, मैं बनकर, तुझे अपने नाम से प्यार हो जाएगा,
थोड़ी सी तो खोल खिड़की मन की, पता भी ना चलेगा और तुझे ईश्क़ हो जाएगा,

अजून वाचा
Shirish Sharma तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी शायरी
1 महिना पूर्वी

आब- ओ- दाना , छत, बिस्तर, सब मिला आज
कल फ़िर करेंगे मिन्नत ज़िन्दगी, देखकर तेरा मिज़ाज

Shirish Sharma तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
1 महिना पूर्वी

वो महबूब गलियां
वो सड़कें
नुक्कड़
दरख्त
दरिया- वरिया
ख्वाब में
मुसलसल
आने
लगे हैं सब
गो कि
जानते हों
हमारा मिलना
ना होगा
अब

अजून वाचा