भावों की ये, अभिव्यक्ति शब्दों के आधार है मेरी कलम ही, मेरे अस्तित्व की पहचान है.


Uma Vaishnav verified तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी गाणे
14 तास पूर्वी

चुनरियां...


🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳

ओ रंगरेज मोहे रंग दे चुनरियां ,
                    तीन रंग में डाल के,
जिसे ओढ़  हिंद की सेना,
                   खेले अपनी जान से,
पहला रंग केसरी रंगना,
जो प्रतीक शौर्य और शान का 
                ओ रंगरेज......
दूसरा रंग सफेद ही रखना 
जो प्रतीक शांति और सत्य का
                 ओ रंगरेज.....
तीसरा रंग हरा रंग देना,
जो प्रतीक हरियाली और खूशहाली का ।
ओ रंगरेज .......

Uma vaishnav
मौलिक और स्वारचित

अजून वाचा
Uma Vaishnav verified तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
2 दिवस पूर्वी

उठ कवि कलम उठा तू
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उठ कवि,
कलम उठा तू,
राष्ट्रीय प्रेम जगा तू,
ना अब कही कोई हिंसा हो,
ना अब कोई घर जला हो,
दिलो में प्यार जगा तू,
ऐसा गीत सुना तू।
उठ कवि,
कलम उठा तू,
राष्ट्रीय प्रेम जगा तू,
ना जाति-पाती का झगड़ा हो,
ना मजहब का कोई लफड़ा हो,
ऐसा रस बरसा तू,
प्रेम कविता बना तू।
उठ कवि,
कलम उठा तू,
राष्ट्रीय प्रेम जगा तू,
ना भ्रष्ट कोई नेता हो,
ना कष्ट कोई से‍हता हो,
ऐसा नेता जगा तू,
नया इतिहास बना तू।
उठ कवि,
कलम उठा तू,
राष्ट्रीय प्रेम जगा तू,
ना बेटियों की हत्या हो,
ना नरिया तबाह हो,
ऐसा सम्मान जगा तू,
नारी सम्मान जगा तू।
उठ कवि,
कलम उठा तू,
राष्ट्रीय प्रेम जगा तू,
ना अब कोई अशिक्षित हो,
ना अब कोई विचलित हो,
ऐसा ज्ञान फैला तू,
अक्षर ज्ञान जगा तू।
उठ कवि,.......

         स्वरचित एवम् मौलिक
             उमा वैष्णव
            सुरत (गुजरात)

अजून वाचा
Uma Vaishnav verified तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी ब्लॉग
2 दिवस पूर्वी

तीन रंग का हमारा झंडा,
कहते हैं हम जिस को,
🇮🇳तिरंगा 🇮🇳
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएंँ

Uma Vaishnav verified तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी सुविचार
3 दिवस पूर्वी

जब भी चाँद की परछाई देखती हूँ मुझे तुम ही नजर आते हो




Uma vaishnav

Uma Vaishnav verified तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले English कविता
3 दिवस पूर्वी

बेटियाँ
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बेटियां तो मां की परछाई होती है
घर वालों के दिल में समाई होती है

बेटी होती है अनमोल खजाना,
भाग्यशाली के घर ही आई होती है,

सब के दिल में यह प्रेम रस घोले
दिल में इसके प्रेम की गहराई होती है

सुख और दुख में जो शामिल होती
जाने फिर भी क्यू बेटियाँ पराई होती है


Uma vaishnav
मौलिक और स्वरचित

अजून वाचा
Uma Vaishnav verified तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
3 दिवस पूर्वी

दूसरी माँ
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माँ तो माँ होती है,
पहली और दूसरी में,
इसकी गिनती कब होती हैं

दया, करुणा, चिंता
और ममता जिसमे हो,
सही में वही माता होती ।

माँ की परिभाषा,
कहाँ कोई दे पाया,
दर्द में माँ का नाम ही पहले आया

बिन बोले सब समझे,
माता ऎसी ही होती,
माँ की तुलना कभी किसी से नहीं होती

उमा वैष्णव
मौलिक और स्वरचित

अजून वाचा
Uma Vaishnav verified तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले English कविता
1 आठवडा पूर्वी

जीवन और नदी
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जीवन है नदी के समान

बहते रहना इसका काम,

राह में कई पड़ाव मिलेंगे,

कहीं शहर कहीं गांव मिलेगें,

सुख-दुख को ऐसा ही जान,

आयेगे ही जीवन में ये मान,

इनसे तू कभी न घबराना,

तेरा काम चलते ही जाना,

अंत में जब यह थक जाती,

समुन्द्र में जाकर मिल जाती,

जीव का भी जब अंत आता,

जाकर परमाता में मिल जाता

उमा वैष्णव

मौलिक और स्वरचित

अजून वाचा
Uma Vaishnav verified तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी कविता
1 आठवडा पूर्वी

अर्थ
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तुम मेरे जीवन की परिभाषा
तुम मेरे दिल की हो आशा ,
तुम मेरे दिल में समाई हो,
तुम मेरे लिए ही आई हो,
तुम जीवन का शीतल रूप ,
तुम बिन जीवन जैसे धूप ,
तुम बिन जीवन व्यर्थ है,
मैं शब्द हूँ तुम्हारा,
तू मेरा अर्थ हैं।
उमा वैष्णव
मौलिक और स्वरचित

अजून वाचा
Uma Vaishnav verified तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले English कविता
1 आठवडा पूर्वी

भारत माता का दुख
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आओ तुमको एक बूढ़ी मां की कथा सुनाते हैं,
उनके के मन के दर्द की तुमको व्यथा सुनाते हैं,

लंगडाते कदमों से वृद्धा पहुंची जब क्लीनिक,
बोले डॉक्टर क्या पांव में कुछ हैं .. तकलीफ,

बोली वृद्धा तकलीफ पांव की 65 में शुरू हुई ,
जब पाकिस्तान ने भारत से लड़ाई करी थी,

ये तो दर्द अब हो गया बस.. आता - जाता,
इस दर्द पर मेरा अब इतना ध्यान नही जाता


तब पूछे डॉक्टर तो क्या गुटने है दुखते,
वृद्धा बोली ये दर्द 70 से ही शुरू हुआ था ,

गुटने के दर्द की भी अब कोई परवाह नहीं ,
यह भी इतना मुझको अब सताता नहीं,

तो बोलो माता कौन सी तकलीफ सताती हैं,
जिसके कारण..... माता तू.... लंगडाती है,


पीट हैं दुखती, सर चक्कराता, देख कर ये सब,
मेरा दिल घबराता, सुरक्षित नही घर की बाला,

बच्ची हो, या हो युवा, कोई भी नार सुरक्षित कहाँ,
इसका कोई इलाज हो तो मुझको तुम बतलाना।

सुन बात वृद्धा की डॉक्टर कुछ समझ न पाया,
वृद्धा के किसी दर्द जा इलाज करना उसे आया,

तन पर तिरंगा लपेटी वो महिला थी भारत माता,
जिस के दर्द का इलाज नहीं कोई भी कर पाता।

सुना कर करूं गाथा आज आंँख मेरी भी रोई,
इसका कोई इलाज हो तो हमें.. बता दो भाई

उमा वैष्णव
मौलिक और स्वरचित

अजून वाचा
Uma Vaishnav verified तुमचे अपडेट्स पोस्ट झाले हिंदी ब्लॉग
2 आठवडा पूर्वी

🙏 धन्यवाद मातृभारती. कॉम... 🙏🙏हमें सम्मानित करने के लिए 🙏 🙏 🙏