Aarti Garval लिखित कथा

मुलाक़ात - एक अनकही दास्तान - 12

by Aarti Garval
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आदित्य ने गहरी सांस ली और कांपते हुए हाथों से हवेली का पुराना, भारी दरवाज़ा खोला। दरवाज़ा चरमराहट के ...

मुलाक़ात - एक अनकही दास्तान - 11

by Aarti Garval
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आदित्य की धड़कनें तेज़ थीं। ट्रेन से उतरने के बाद से ही उसके भीतर एक अजीब सी बेचैनी घर ...

मुलाक़ात - एक अनकही दास्तान - 10

by Aarti Garval
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आदित्य का दिल अब सिर्फ एक चीज़ चाहता था—संयोगिता। समय बीतता जा रहा था, पर उसकी तड़प, उसकी बेचैनी ...

मुलाक़ात - एक अनकही दास्तान - 9

by Aarti Garval
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मुंबई की रफ़्तार हर किसी को अपने साथ बहा ले जाती है—लोकल की गूंजती पटरियाँ, ऑफिस की दौड़, और ...

मुलाक़ात - एक अनकही दास्तान - 8

by Aarti Garval
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मुंबई—वो शहर जो किसी एक ज़िंदगी की रफ़्तार से नहीं चलता, बल्कि लाखों धड़कनों की ताल पर सांस लेता ...

मुलाक़ात - एक अनकही दास्तान - 7

by Aarti Garval
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रेलवे स्टेशन की भीड़ भले ही रोज़ की तरह थी—ट्रेनों की आवाज़ें, चायवालों की पुकार, भागते कदम, और अपने-अपने ...

मुलाक़ात - एक अनकही दास्तान - 6

by Aarti Garval
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जैसलमेर की हवाएं उस दिन कुछ ज़्यादा ही उदास थीं। जैसे रेत के कणों में भी एक दर्द समाया ...

मुलाक़ात - एक अनकही दास्तान - 5

by Aarti Garval
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सूरज अपनी अंतिम किरणों को धरती पर बिखेरते हुए धीरे-धीरे क्षितिज की ओर ढल रहा था। जैसलमेर की सोनाली ...

मुलाक़ात - एक अनकही दास्तान - 4

by Aarti Garval
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संयोगिता के जाने के बाद आदित्य के मन में एक बेचैनी घर कर गई। वह जानता था कि उसकी ...

मुलाक़ात - एक अनकही दास्तान - 3

by Aarti Garval
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धीरे-धीरे जैसलमेर की वो पुरानी गलियाँ आदित्य के लिए सिर्फ शहर की गलियाँ नहीं रहीं। वे उसके दिल की ...