तलवार अभी भी वर्धान की गर्दन पर थी।पारस की आँखें — गुस्से से भरी।वर्धान ने हिलने की कोशिश नहीं ...
पारस चुपचाप बैठा रहा।प्रणाली के रोने की आवाज़ धीरे धीरे शांत हो रही थी।कितनी देर बाद —उसने अपना सिर ...
"वर्धान — छोड़ो उसे!"सायूरी आ गई थी।उसने दोनों को अलग किया — वर्धान को पीछे खींचा, कनिष्क को छुड़ाया।कनिष्क ...
गरुड़ लोक में शाम उतर रही थी।सुनहरी रोशनी धीरे धीरे फीकी पड़ रही थी — आसमान में बादल थे ...
वर्धान अपनी नम आंखों और दुनिया जीत लेनी वाली मुस्कान से : मै......और फिर —कुछ याद आया।अचानक।जैसे किसी ने ...
झोपड़ी की खाली ज़मीन देखने के बाद प्रणाली रुकी नहीं।पाँव खुद ब खुद उस राह पर चल पड़े — ...
प्रणाली की आँखें खुली थीं।पर मन कहीं और था।कमरे में धीरे धीरे सब आ गए थे — माँ, पिताजी, ...
सब लोग अगस्त्य को उसके घर ले आए। अर्जुन ने रास्ते में ही डॉक्टरों की पूरी टीम और सारी ...
अगस्त्य सय्युरी के साथ तुरंत कार में बैठा, और कार सीधा अस्पताल पर रुकी।वह कार से निकला… आगे बढ़ने ...
दृश्य: सय्युरी का घर(सय्युरी का घर – अगस्त्य बेचैन खड़ा है। तभी उसका फोन बजता है।)A.V. (फोन पर, घबराहट ...