**पूর্ণ दर्शन‑विज्ञान:“ईश्वर पाना” की मानसिकता पर वेदान्तीय और समाज‑मनोवैज्ञानिक समालोचना**प्रस्तावनासमकालीन धार्मिक विमर्श में “ईश्वर को पाना”, “भगवान की प्राप्ति ...
परिधि पर दौड़ और केंद्र में ठहराव — Vedanta 2.0 का द्वि-छोर जीवनपरिचयआज का जीवन परिधि की दोड़ पर ...
त्याग नहीं, देखना — द्वैत के पार — 𝓐𝓰𝔂𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲धर्म की पुरानी भाषा प्रायः कहती रही है —"छोड़ो।"वासना ...
संन्यास क्या है?संन्यास का अर्थ किसी चीज़ को छोड़ देना नहीं, बल्कि जीवन को ऐसे देखना है जहाँ चुनाव ...
"यह किताब नहीं है"अध्याय 1: उधार का बोझ — हम कैसे फँसे?कहाँ से शुरू हुआ:बच्चा पैदा होता है — ...
भूमिकापहला शब्द आने से पहलेयह पुस्तक पहले से योजनाबद्ध नहीं थी। न यह किसी पुस्तकालय में जन्मी, न किसी ...
वेदांत 2.0 – प्रस्तावना (Preface)मैं देह से मनीष कुमार हूँ, पर इस ग्रंथ में "अज्ञात अज्ञानी" के नाम से ...
अस्तित्ववेदांत 2.0: सृष्टि, मनुष्य और सिद्धांतों के निर्माण से पहले की 'मूल विज्ञान' और 'केवल समझ' की अवधारणा का ...
।वेदांत 2.0 लाइफ़": तुरीय-आधारित '0 बोध' को लाइफ़–साइंस और कॉन्शसनेस–स्टडीज़ के एकीकृत फ्रेमवर्क के रूप में प्रस्तावसार (Abstract) – ...
बोध पहले अनुभव है, बाद में शास्त्र। पहले भीतर एक घटनाक्रम घटता है — आनंद, मौन, संतोष, प्रस्फुटन, सहजता। ...