CHIRANJIT TEWARY लिखित कथा

तेरे मेरे दरमियान - 74

by CHIRANJIT TEWARY

अशोक फिर कहता है --अशोक :- बेटा मैं तुम्हें बाद मे कॉल करता हूँ ।आदित्य :- ठिक है पापा ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 53

by CHIRANJIT TEWARY
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एकांश गुणा और चतूर से कहता है--थैंक्स यार तुम दौनो ने मेरी बहुत हेल्प की । अगर आज ये ...

तेरे मेरे दरमियान - 73

by CHIRANJIT TEWARY
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मोनिका :- क्यों आदित्य, क्या हूआ , हम ऐसा क्यों नही कर सकते ।आदित्य :- क्योंकी ये गलत है ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 52

by CHIRANJIT TEWARY
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मातंक कहता है--> तुम चिंता ना करो मित्र कुम्भनी हमारी भी पुत्री हैऔर उसे बचाने के लिए हम कुछ ...

तेरे मेरे दरमियान - 72

by CHIRANJIT TEWARY
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कुछ देर बाद पापा ने नरमी से कहा—अशोक :- "बेटा, तू पहले अपने आपसे साफ-साफ कह—क्या तू उसे खोने ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 51

by CHIRANJIT TEWARY
  • 474

कुंभ्मन परेसान होकर कहता है--> ये....ये मुझे क्या हो रहा है । मैं....मैं ठीक से चल क्यों नही पा ...

तेरे मेरे दरमियान - 71

by CHIRANJIT TEWARY
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आदित्य फोन कट देता है , जानवी को कुछ समझ मे नही आ रहा था के दोनो के बिच ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 50

by CHIRANJIT TEWARY
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> भाया वो...वोह...।दुसरा आदमी कहता है--> अरे भाया पहले थौड़ी सांस ले लो फिर कहना।वो आदमी कुछ दैर सांस ...

तेरे मेरे दरमियान - 70

by CHIRANJIT TEWARY
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कुछ लोग मुस्कुरा रहे थे—“लगता है आदित्य सर का सॉफ्ट साइड भी है।”जानवी यह सब देख सुन रही थी, ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 49

by CHIRANJIT TEWARY
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दुसरा आदमी कहता है--> पहले तो ना देखे है तन्ने यहां । ऐ कौन हो भाया और यहां के ...