CHIRANJIT TEWARY लिखित कथा

तेरे मेरे दरमियान - 97

by CHIRANJIT TEWARY

जानवी हैरानी से --जानवी: - और वो 50 लाख.... जो तुमने मेरे रिहाई के लिए दिए थे ?विकास :- ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 71

by CHIRANJIT TEWARY
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संजीवनी मंत्र का नाम सुनते ही कुंम्भनी कहती है--> संजीवनी मंत्र ये वही मंत्र है ना पिताश्री जो हमारे ...

तेरे मेरे दरमियान - 96

by CHIRANJIT TEWARY
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आदित्य विकास को थपथपाते हूए कहता है --आदित्य :- Good , अब जाओ । जानवी तुम्हारा इंतजार कर रही ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 70

by CHIRANJIT TEWARY
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कुम्भन कहता है --> ये मुझे ञात नही मित्र परतुं इस समय हित और अहित की चितां का नही ...

तेरे मेरे दरमियान - 95

by CHIRANJIT TEWARY
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काली ने धीरे से कहा।काली :- मेरा क्या है? मैं सज़ा काट लूँगा…फिर नई ज़िंदगी शुरू कर लूँगा।उसने विकास ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 69

by CHIRANJIT TEWARY
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वह इतना तेजी से घुम रहा था के उसके घुमने से हवा मे सांय सांय जैसी आवाज आने लगता ...

तेरे मेरे दरमियान - 94

by CHIRANJIT TEWARY
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आदित्य :- पहली बात तो ये , के वो कहां है मुझे ये नही पता और मैने उसे क्यों ...

श्रापित एक प्रेम कहानी - 68

by CHIRANJIT TEWARY
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दक्षराज अघोरी बाबा से कहता है--> ठिक है ठिक है आप पहले सांत हो जाईए और आप अंदर आईए ...

तेरे मेरे दरमियान - 93

by CHIRANJIT TEWARY
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जानवी आदित्य को अपने साथ रहने के लिए बोल रही थी तब आदित्य सौचता है --" काश ये तुम ...

तेरे मेरे दरमियान - 92

by CHIRANJIT TEWARY
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अशोक उन दोनो को दैखकर खुश हो जाता है और भगवान से कहता है --अशोक :- हे भगवान , ...