“धर्मवीर,” अपनी अर्द्धचेतना में जाई मुझे ठीक पहचान न पाईं। समझीं, मैं यशवीर नहीं हूं। धर्मवीर हूं। ...
“मैं सिनेमा जा रही हूं,”गली के नुक्कड़ पर उस बुद्धवार जैसे ही मां अपने झोलों के साथ प्रकट हुईं,अपनी ...
कहानी: दीपक शर्मा “मेरी ट्विट अपनी पूरी उड़ान नहीं भर रही। ...
कुंती को वह खेल अकस्मात ही सूझा था। टंडन मेम ...
स्टेशन पर बहन ने मुझे अकेले पाया तो एकाएक उस का चेहरा बदल- बदल गया। भेद- भरे स्वर में ...
कहानी : दीपक शर्मा इंदिरा की बीमारी का नाम हमें ...
नंदू मुझे कस्बापुर में मिला था। अपने तेरहवें और मेरे ग्यारहवें वर्ष में।सन उन्नीस सौ बासठ में। ...
ऊटक नाटक सोमा हाथ बांध कर फिर हमारे ...
साहित्य के क्षेत्र में मेरी अनभिज्ञता अजेय- अज्ञान के निकट थी और सुमंत्रित उन लोगों की भलाई चाहने के ...
“सपाट सड़कों पर गाड़ी बहुत दौड़ा ली। आज ऊबड़- खाबड़ रास्ते नापते हैं। शहर के बाहर निकलेंगे,” सन उन्नीस ...