सुबह की पहली किरणें अभी जंगल की ऊँची पहाड़ियों पर पड़नी शुरू ही हुई थीं। अर्जुन राठौर की काली ...
रात के लगभग ढाई बज रहे थे। पूरा अनाथालय गहरी नींद में डूबा हुआ था। बरामदे में लगी पुरानी ...
उस रात... आसमान पूरी तरह शांत था। बारिश रुक चुकी थी, लेकिन हवा में अब भी मिट्टी की भीनी-सी ...
रात गहरा चुकी थी। अनाथालय के लंबे बरामदों में सन्नाटा पसरा हुआ था। टूटी हुई खिड़कियों से आती ठंडी ...
"जिस दिन इंसान नहीं, किस्मत रोई थी..." रात के ठीक बारह बजे... आसमान जैसे अपना सारा दर्द धरती पर ...
अध्याय 5: स्याही का काला सच आर्यन की सांसें धौंकनी की तरह चल रही थीं। 'स्याही' गाँव का वह ...
अध्याय 4: रूहानी भूल-भुलैया तहखाने की उस ठंडी और घुटन भरी हवा में आर्यन का दम घुटने लगा था। ...
अध्याय 3: तहखाने का राज़ और श्रापित डायरी आर्यन की सांसें फूल रही थीं। हॉल का दरवाजा किसी ने ...
अध्याय 2: हवेली की दीवारों के राज़आर्यन ने हवेली के भारी-भरकम लोहे के दरवाज़े को धक्का दिया। दरवाज़ा एक ...
अध्याय 1: स्याही का निमंत्रण मुंबई की चकाचौंध भरी रोशनियों के बीच, आर्यन का मन कहीं और ही भटक ...