Dharmpal Sroj लिखित कथा

महबूब की वह हसीन रात

by Dharmpal Sroj
  • 444

लखनऊ की सर्दियों की रात थी। दिसंबर का महीना, घड़ी में रात के साढ़े ग्यारह बज रहे थे और ...

रिश्तों का एहसास

by Dharmpal Sroj
  • (3.9/5)
  • 1.4k

एक ऐसा सफर, जिसमें मंजिल से ज्यादा रास्ते ने सिखायापूरनपुर की सुबह में एक अलग ही अपनापन था।सूरज निकलने ...

एक पिता का आखिरी वादा

by Dharmpal Sroj
  • (5/5)
  • 1.4k

दीवार पर लगी पुरानी घड़ी कई साल पहले ही बंद हो चुकी थी, लेकिन राघव ने उसे कभी दीवार ...

अधूरी मुलाकात का पूरा प्यार‎

by Dharmpal Sroj
  • 1.4k

‎‎शहर की उस पुरानी गली में शाम हमेशा थोड़ी जल्दी उतरती थी। सूरज पहाड़ियों के पीछे छिपने से पहले ...

यह मेरी जिंदगी की कहानी है जो मैंने जिया है वही मैंने लिखा है

by Dharmpal Sroj
  • 1.4k

मेरी जिंदगी की कहानी — जो मैंने जिया है, वही लिखा हैमेरा नाम धर्मपाल सरोज है। मैं उत्तर प्रदेश ...

चांट,फिरोजपुर भूतिया हवेली

by Dharmpal Sroj
  • 1.9k

चांट फिरोजपुर की भूतिया हवेलीपीलीभीत शहर से लगभग दूर, पूरनपुर की तरफ जाने वाले रास्ते पर एक छोटा-सा गाँव ...