ऋगुवेद सूक्ति (68) की व्ययाख्य"मां सेधत"ऋग्वेद --7/32/9भावार्थ --आलस्य मत कऱो।पूरा मंत्र अर्थ ऋग्वेद 7.32.9 का मंत्र इस प्रकार है—मा ...
ऋगुवेद सूक्ति (67)की व्याख्या"दक्षता महे"ऋगुवेद-7/32/9भावार्थ--दक्ष बनो।पूरा मंत्र अर्थ सहितऋग्वेद 7.32.9 का मूल मंत्र इस प्रकार है—मा स्रेधत सोमिनो दक्षता ...
ऋगुवेद सूक्ति (66) की व्याख्या"देवानाम् सख्यमुप सेदिमा वयम्।ऋग्वेद --1/89/3भावार्थ - हम श्रेष्ठ लोगों की संगति प्राप्त करें।"देवानां सख्यमुप सेदिमा ...
ऋग्वेद सूक्ति (१) की व्याख्या"न स सखा यो न ददाति सख्ये"ऋग्वेद --10/117/4भावार्थ -- ,वह मित्र नहीँ है जो सहायता ...
ऋग्वेद सूक्ति-(२) की व्याख्या*केवलाघो भवति केवलादी"ऋग्वेद --1/117/4भावार्थ --जो अकेले भोग करता है वह पाप का भागी होता है। पूरा ...
ऋग्वेद सूक्ति(3) की व्याख्या"न ऋते श्रान्तस्य सख्यायदेवा:"4/33/11भावार्थ -देवता(ईश्वर) श्रम करने वाले के सिवा और से मित्रता नहीं करते।ऋग्वेद 4.33.11 ...
ऋग्वेद सूक्ति-(4) की व्याख्याऋगुवेद--10/191/2सं गच्छव्व सं वदध्वंभावार्थ--साथ-साथचलो, साथ ऋग्वेद 10.191.2 का मंत्र है:संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्।देवा भागं ...
ऋग्वेद सूक्ति --(5) की व्याख्या"यो जागार तमृच: कामयन्ति"ऋग्वेद--5/44/14भावार्थ --जो जागता है उसे ऋचाएँ चाहती हैं।इसका पूरा मंत्र अर्थ सहितऋग्वेद ...
ऋगुवेद सूक्ति-- (6) की व्याख्या"अग्ने नय सुपथा राए अस्मान"ऋग्वेद--1/189/1भावार्थ,--हे ईश्वर (अग्नि देव) ! मुझे धन के लिए सन्मार्ग पर ...
ऋगुवेद सूक्ति-- (7) की व्याख्या"न यस्य हन्यते सखा न जीयतेऋगुवेद- --10/152/1भावार्थ --हे प्रभु! आपके भक्त को न कोई नष्ट ...