दया की कीमतसूरज डूब रहा था, पड़ोस पर लंबी, खूनी परछाईं पड़ रही थी। नया परिवार यह डरावना नज़ारा ...
दादासाहेब राख से प्यार नहीं करते थे; वे राख से होने वाली तबाही की पूजा करते थे। दुनिया के ...
दादासाहेब की ताकत सिर्फ़ उनकी पॉलिटिकल पहुँच या उनके पैसे से नहीं आई थी; यह उनके घर में रहने ...
इस शहर में, सूरज उम्मीद जगाने नहीं उगता था; वह तो बस पिछली रात के ज़ख्म दिखाने उगता था। ...