आखिरी रखवाला: एक पिता की निराशाऑफिशियल खन्ना अंदर तक हिल गए थे। उनका चेहरा पीला पड़ गया था, और ...
दादासाहेब ने फ़ोन काट दिया। उन्हें अब और कुछ कहने की ज़रूरत नहीं थी। उन्हें ठीक-ठीक पता था कि ...
दादासाहेब ने फ़ोन पकड़ा, उनकी उंगली डायलर पर थी, राख को बुलाने के लिए तैयार। लेकिन कॉल कनेक्ट होने ...
दया की कीमतसूरज डूब रहा था, पड़ोस पर लंबी, खूनी परछाईं पड़ रही थी। नया परिवार यह डरावना नज़ारा ...
दादासाहेब राख से प्यार नहीं करते थे; वे राख से होने वाली तबाही की पूजा करते थे। दुनिया के ...
दादासाहेब की ताकत सिर्फ़ उनकी पॉलिटिकल पहुँच या उनके पैसे से नहीं आई थी; यह उनके घर में रहने ...
इस शहर में, सूरज उम्मीद जगाने नहीं उगता था; वह तो बस पिछली रात के ज़ख्म दिखाने उगता था। ...