Gxxpal R23aywarlkg लिखित कथा

RAAKH - खामोश चीखों का शहर - 7

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आखिरी रखवाला: एक पिता की निराशाऑफिशियल खन्ना अंदर तक हिल गए थे। उनका चेहरा पीला पड़ गया था, और ...

RAAKH - खामोश चीखों का शहर - 6

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दादासाहेब ने फ़ोन काट दिया। उन्हें अब और कुछ कहने की ज़रूरत नहीं थी। उन्हें ठीक-ठीक पता था कि ...

RAAKH - खामोश चीखों का शहर - 5

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दादासाहेब ने फ़ोन पकड़ा, उनकी उंगली डायलर पर थी, राख को बुलाने के लिए तैयार। लेकिन कॉल कनेक्ट होने ...

RAAKH - खामोश चीखों का शहर - 4

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दया की कीमतसूरज डूब रहा था, पड़ोस पर लंबी, खूनी परछाईं पड़ रही थी। नया परिवार यह डरावना नज़ारा ...

RAAKH - खामोश चीखों का शहर - 3

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दादासाहेब राख से प्यार नहीं करते थे; वे राख से होने वाली तबाही की पूजा करते थे। दुनिया के ...

RAAKH - खामोश चीखों का शहर - 2

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दादासाहेब की ताकत सिर्फ़ उनकी पॉलिटिकल पहुँच या उनके पैसे से नहीं आई थी; यह उनके घर में रहने ...

RAAKH - खामोश चीखों का शहर - 1

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इस शहर में, सूरज उम्मीद जगाने नहीं उगता था; वह तो बस पिछली रात के ज़ख्म दिखाने उगता था। ...