“वो चिट्ठी… जिसने सब बदल दिया” रात के करीब साढ़े दस बजे थे। शहर की सड़कों पर हल्की बारिश हो रही ...
मौत का दस्तक बनारस की उस रात में गंगा के घाटों पर सन्नाटा नहीं, बल्कि एक अजीब सी बेचैनी थी। ...