Dr. Suryapal Singh लिखित कथा

नकल से कहीं क्रांति नहीं हुई - 24

by Dr. Suryapal Singh
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जीतेशकान्त पाण्डेय- आपने एक कविता में लिखा है-‘दशानन कब नहीं रहे हैं किस देश में, किन्तु राम छत्रकदंड की ...

नकल से कहीं क्रांति नहीं हुई - 23

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जीतेशकान्त पाण्डेय- आपने ‘पूर्वापर’ पत्रिका का एक मलयालम विषेशांक प्रकाशित किया। इसकी योजना कैसे बनी और इसका उद्देश्य क्या ...

नकल से कहीं क्रांति नहीं हुई - 22

by Dr. Suryapal Singh
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जीतेशकान्त पाण्डेय- अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि आपके प्रेरक साहित्यकार कौन रहे हैं? आप अपने सम्बन्ध में ...

नकल से कहीं क्रांति नहीं हुई - 21

by Dr. Suryapal Singh
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जीतेशकान्त पाण्डेय- ‘रात साक्षी है’ में सीता भी अनेक बिंदुओं पर प्रश्न करती हैं। क्या इसे भी धर्मवीर भारती ...

नकल से कहीं क्रांति नहीं हुई - 20

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जीतेशकान्त पाण्डेय- ‘रात साक्षी है’ आपकी एक भिन्न प्रकार की रचना है। इसमें सीता तथा उनसे सम्बद्ध लोगों की ...

नकल से कहीं क्रांति नहीं हुई - 19

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जीतेशकान्त पाण्डेय- ‘अपना आकाश’ और ‘आंच’ की समीक्षा इंडिया टुडे पत्रिका में भी छपी। ‘अपना आकाश’ एक पुरवे की ...

नकल से कहीं क्रांति नहीं हुई - 18

by Dr. Suryapal Singh
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‘कंचनमृग’ का उत्तर पक्ष ‘शाकुनपांखी’ इसी बीच लिखा गया । यह 2005 में प्रकाशित हुआ। इसी वर्ष शिक्षा से ...

नकल से कहीं क्रांति नहीं हुई - 17

by Dr. Suryapal Singh
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जीतेशकान्त पाण्डेय- अवकाश प्राप्ति के बाद आपकी दिनचर्या क्या रही ? डॉ0 सूर्यपाल सिंह- अवकाश प्राप्ति के बाद एक ...

नकल से कहीं क्रांति नहीं हुई - 16

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4 मार्च 1990 को यह शादी सम्पन्न हो गयी। शादी निपटने के बाद मैं अपने कॉलेज चला गया। अब ...

नकल से कहीं क्रांति नहीं हुई - 15

by Dr. Suryapal Singh
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इसी तरह हर वर्ष एक सप्ताह व्याख्यान एवं मंचीय कार्यक्रम का आयोजन किया जाता। बच्चे इसमें काफी रुचि लेते। ...