Jyoti Prajapati लिखित कथा

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 41 (अंतिम भाग)

by Jyoti Prajapati
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ये मेरी चार साल पुरानी रचना थी। जिसे मैने तब पब्लिश नहीं किया था क्योंकि लैपटॉप खराब हो गया ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 40

by Jyoti Prajapati
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भूपेंद्र के जीवन का सूरज अब पूरी तरह अस्त हो चुका था। जिस साहब वाली छवि को बचाने के ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 39

by Jyoti Prajapati
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भूपेंद्र ने एलिमनी चुकाने के लिए बैंक से लोन लेना चाहा, लेकिन उसे लोन नहीं मिला क्योंकि उसके पुराने ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 38

by Jyoti Prajapati
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काया ने महसूस कर लिया था कि भूपेंद्र पिछले कुछ दिनों से उखड़ा-उखड़ा रहता है। उसके चेहरे की हवाइयाँ ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 37

by Jyoti Prajapati
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मनोरमा देवी के कानों तक यह खबर पहुँच चुकी थी कि उनके राजा बेटे की नौकरी जा चुकी है। ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 36

by Jyoti Prajapati
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वंशिका को गुप्त सूत्रों से यह पुख्ता जानकारी मिल चुकी थी कि भूपेंद्र अब बेरोज़गार हो चुका है। जब ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 35

by Jyoti Prajapati
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अगली सुबह जब सूरज की रोशनी उस घर की खिड़कियों से टकराई, तो वंशिका के लिए वह घर अब ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 34

by Jyoti Prajapati
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महिमा की मुस्कान अब गायब हो चुकी थी। उसने एक गंभीर वकील की तरह फाइल मेज पर रखी और ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 33

by Jyoti Prajapati
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काया एक शातिर दिमाग औरत थी। वह भूपेंद्र के चेहरे पर छाई हवाइयों और उसकी उखड़ी सांसों को देखकर ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 32

by Jyoti Prajapati
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अगली सुबह जब शहर की गलियों में लोग अपने काम के लिए निकल रहे थे, भूपेंद्र अपनी मर्यादा और ...