Jyoti Prajapati लिखित कथा

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 7

by Jyoti Prajapati
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उस रात, डाइनिंग टेबल पर काया के हाथ के बने पुलाव की खुशबू ने भले ही माहौल में थोड़ी ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 6

by Jyoti Prajapati
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दोपहर का वक्त था। खिड़की से आती धूप अब फर्श पर लंबी लकीरें बना रही थी। घर में एक ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 5

by Jyoti Prajapati
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रात के दस बज चुके थे। बच्चों को सुलाने के बाद काया ने पूरे घर का चक्कर लगाया। ड्राइंग ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 4

by Jyoti Prajapati
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शाम के पांच बज रहे थे। सूरज की सुनहरी किरणें अब नारंगी होकर खिड़कियों से विदा ले रही थीं। ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 3

by Jyoti Prajapati
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दोपहर के डेढ़ बज रहे थे। सड़क पर स्कूल बसों के हॉर्न की आवाज़ें गूँजने लगी थीं। काया ठीक ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 2

by Jyoti Prajapati
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सुबह की सुनहरी धूप अब तीखी होने लगी थी। भूपेंद्र के ऑफिस जाने के बाद घर की हलचल थमी ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 1

by Jyoti Prajapati
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सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की ...

सुरमयी आंखों वाली - 5 - अंतिम भाग

by Jyoti Prajapati
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अबतक मैंने जिस सुरमयी को जाना था ये उससे बिल्कुल अलग थी ! इतना दुखद और भयावह अतीत ! ...

सुरमयी आंखों वाली - 4

by Jyoti Prajapati
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उस दिन सुरमयी कहीं गयी हुई थी ! उसकी डायरी बाहर डेस्क पर ही रखी हुई थी !! जब ...

सुरमयी आंखों वाली - 3

by Jyoti Prajapati
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बहुत दिनों तक मेरे दिल ओर दिमाग मे बस सुरमयी ही घूमती रही..!! मैंने एक दिन तय किया उस ...