Pooja Singh लिखित कथा

वाशिकारिणी - 6

by Krishna bhakt bhajan and art
  • 339

इच्छा : प्रेम या प्रेतखाई के किनारे खड़ा शक्ति काँप रहा था।नीचे अंधेरा था… अंतहीन।उसी अंधेरे से एक जानी-पहचानी ...

वाशिकारिणी - 5

by Krishna bhakt bhajan and art
  • 762

आईना जो सच नहीं दिखाताशक्ति की चीख किले की दीवारों से टकराकर लौट आई…लेकिन उसकी आवाज़ उसे खुद सुनाई ...

पंखो में बंधा प्रेम

by Krishna bhakt bhajan and art
  • 639

पक्षीलोक की सुबह आज कुछ अलग थी।आकाश सामान्य से अधिक उजला था, हवाओं में हल्की सी मिठास थी, और ...

वाशिकारिणी - 4

by Krishna bhakt bhajan and art
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  • 1.1k

सच का पहला दरवाज़ाउस आदमी की आवाज़ में अजीब सी ठंडक थी।शक्ति उसकी तरफ देखता रहा, जैसे शब्द उसके ...

दो दिल कैसे मिलेंगे - 46

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  • 642

अंधकार लोक के विनाश के बाद, जब समस्त लोकों में संतुलन लौट आया, तब आकाश के द्वार एक बार ...

मेरी हो तुम - 3

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  • 981

विवेक – अदिति | गहरा रिश्तारात का सन्नाटा चारों ओर फैला था।घर सो चुका था… लेकिन अदिति की आँखों ...

दो दिल कैसे मिलेंगे - 45

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  • (4/5)
  • 741

पुनर्मिलन की शांति अभी पूरी तरह उतरी भी नहीं थी कि आकाश में अचानक काले बादल घिर आए। हवा ...

मेरी हो तुम - 2

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  • 972

आदित्य – चेताक्क्षी | सोलफुल रिश्तामंदिर में धूप और अगरबत्ती की खुशबू फैली थी।चेताक्क्षी दीपक जला रही थी।आदित्य उसे ...

दो दिल कैसे मिलेंगे - 44

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  • 1k

नागलोक में आज असामान्य हलचल थी। काले आकाश में लाल बिजली चमक रही थी, और नाग-स्तंभों पर लिपटे सर्प ...

मेरी हो तुम - 1

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  • 2.8k

पैहरगढ़ में कई दिनों बाद फिर से रौनक लौट आई थी।मंदिर की घंटियाँ, घरों में दीपक, और हर चेहरे ...