पहला अध्याय: किस्मत की ठोकरशहर की चकाचौंध से दूर, एक पुराने और टूटे हुए मकान में अंजलि अपनी बीमार ...
(जयपुर, सरकारी दफ़्तर। दोपहर 3:00 बजे) अन्वेषा पट्टनायक (25) अपने दफ़्तर की खिड़की के पास खड़ी थी। बाहर राजस्थान की ...
"प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम""सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ने के लिए क्या प्यार की बलि देना ज़रूरी है?"पर समय का ...