"पिता जी ने अपनी ज़िंदगी की आखिरी जमापूंजी भी दांव पर लगा दी थी, लेकिन क्या रोशनी उनका यह ...
पहाड़ की बर्फीली चोटियों पर जब तेज़ ठंडी हवाएँ चलतीं, तो ऐसा लगता मानो सुइयाँ जिस्म में चुभ रही ...
अरे बहू! ज़रा चाय तो बनाना, और हाँ, मलाई मत डालना," मालती जी ने अपनी जगह से ही आवाज़ ...
शाम के ढलते ही जब आँगन में पुरानी साइकिल की वही जानी-पहचानी चैन की आवाज़ गूँजती, तो पूरे घर ...
अस्पताल के उस ठंडे कमरे में फैली गहरी खामोशी को अचानक रीना की भारी सिसकियों ने तोड़ दिया। रीना ...
रिया के कांपते हाथों ने जैसे ही उस पीले पड़ चुके कागज को खोला, उसकी आंखों के सामने मां ...
मां रसोई के चौखट पर शांत खड़ी थीं, लेकिन उनकी नम आँखों में बरसों का सारा दर्द छलक आया ...
दिल्ली की भागदौड़ भरी कॉर्पोरेट जिंदगी में रिया का फोन जब बजा, तो स्क्रीन पर भाई अमित का नाम ...
शादी के तीन साल बाद जब नेहा अपने गांव वाले पुश्तैनी घर पहुंची, तो उसकी सांसों में बचपन की ...
रात के 11 बज चुके थे। दिल्ली के एक छोटे से किराए के फ्लैट में लैपटॉप की नीली रोशनी ...