prem chand hembram लिखित कथा

मानवता की जीत

by prem chand hembram
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मानवता की जीत (अंतिम संस्करण)धनबाद जिले की छाती पर बसा रहिमनगर…एक छोटा सा कस्बा—जहाँ जिंदगी सरल थी, पर समाज ...

एक छोटी सी भूल

by prem chand hembram
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एक छोटी सी भूल“आप पुरानी सोच के हैं…”अपनी ही बेटी के मुँह से निकले ये शब्द,शहर के प्रतिष्ठित वकील ...

विचारों का संग्राम

by prem chand hembram
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विचारों का संग्राम(उपशीर्षक: क्या मैं आस्तिक हूँ?)प्रातःकाल का समय था।पूरा नगर अभी नींद की गोद में था, पर पंडित ...

भूतों की बारात में झूमर

by prem chand hembram
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भूतों की बारात में झूमर“जब तान, थाप और नृत्य ने अदृश्य जगत को भी बाँध लिया…”डोमन के सिर से ...

अपूर्ण शिक्षा :- एक घातक परिणाम

by prem chand hembram
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सत्-चरित्र: सृष्टि का मूल अस्तित्वक्या आपने कभी गंभीरता से विचार किया है कि किसी समाज, राष्ट्र या सम्पूर्ण सृष्टि ...

भारतीय नारी : सृष्टि की उद्घाता

by prem chand hembram
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भारतीय नारी: सृष्टि, संस्कार और संतुलन की आधारशिलाभारत की पुण्यभूमि पर नारी को सदैव “माँ” का सर्वोच्च स्थान दिया ...

बच्चों से प्रेम या धोखा ?

by prem chand hembram
  • (4.5/5)
  • 918

बच्चों से प्रेम या धोखा ?यह ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर लगभग हर कोई “हाँ” में देता है।लेकिन यदि ...

जब मटकू को मिला भोंपू

by prem chand hembram
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जब मटकू को मिला भोपू(पंचतंत्र शैली की हास्य-व्यंग्य कथा)जंगल के बीचों-बीच एक बूढ़ा पीपल का पेड़ था—वह पेड़ नहीं ...

टूटता हुआ मन - भाग 1

by prem chand hembram
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टूटता हुआ मन भाग :-1(अहंकार से आत्मबोध तक की कथा)रमेश घोष एक प्रतिष्ठित आईआईटी इंजीनियर था।तेज बुद्धि, आधुनिक सोच ...

चार मूर्खों में एक काना

by prem chand hembram
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चार मूर्खों में एक "काना"बहुत पहले की बात है।झारखंड के सुदूर वन-प्रांतीय इलाके में भयंकर अकाल पड़ा।धरती सूख गई, ...