prem chand hembram लिखित कथा

खोटा सिक्का - 5

by prem chand hembram
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खोटा सिक्काशिबू धीरे-धीरे अपने आसन से उठा। उसने एक बार चारों ओर बैठे लोगों पर दृष्टि डाली। सामने चौधरी ...

खोटा सिक्का - 4

by prem chand hembram
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भोर की प्रार्थना समाप्त होते ही शिबू बिना किसी को कुछ बताए मठ से निकल पड़ा। पूर्व दिशा में ...

सदगुरू और सत दीक्षा

by prem chand hembram
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जयगुरु कलियुग में मनुष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता — सत्य की खोज, सद्गुरु और सत्-दीक्षाप्रस्तावनाआज का मनुष्य विज्ञान और ...

क्या दीक्षा आवश्यक है ?

by prem chand hembram
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जयगुरु क्या दीक्षा आवश्यक है? — शास्त्र, संत और मानवता की दृष्टि से एक विचारभारतीय सनातन आध्यात्मिक परंपरा में ...

सब ताले की एक चाबी

by prem chand hembram
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जयगुरु,सब ताले की एक चाबीभूमिकासंसार में असंख्य समस्याएँ हैं—गरीबी, हिंसा, भ्रष्टाचार, पारिवारिक विघटन, तनाव, अनिद्रा, अकेलापन, नशा, असंतोष, युद्ध ...

AI का विकल्प

by prem chand hembram
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AI का विकल्प : क्या प्राचीन भारत में चेतना-आधारित बुद्धिमत्ता की कोई परंपरा थी?मानव सभ्यता आज एक ऐसे युग ...

धर्मराज की सभा - 2

by prem chand hembram
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धर्मराज की सभाप्रथम अध्याय : यमलोक की आपातकालीन सभा (आगे)चित्रगुप्त की वाणी समाप्त होते ही समूची देवसभा मौन हो ...

धर्मराज की सभा - 1

by prem chand hembram
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धर्मराज की सभाप्रथम अध्याय : यमलोक की आपातकालीन सभापृथ्वी पर पाप, भ्रष्टाचार, छल, कपट और अन्याय का ऐसा अंधकार ...

टूटता हुआ मन - भाग 3

by prem chand hembram
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उस दिन विद्यालय का सभागार खचाखच भरा था। शांतनु मंच पर खड़ा था। उसकी आवाज़ में न कृत्रिमता थी, ...

टूटता हुआ मन - भाग 2

by prem chand hembram
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रमेश अपनी पत्नी फरजाना की बेवफाई से भीतर ही भीतर टूट चुका था। कभी हँसी, विश्वास और अपनत्व से ...