रात गहरी हो चुकी थी।मैं बालकनी में खड़ी नीचे देख रही थी।अर्जुन उस अजनबी महिला के सामने खड़ा था।उसके ...
अर्जुन की बाहों में खुद को सुरक्षित महसूस कर रही थी… लेकिन फोन पर लिखे दो शब्द मेरे दिमाग ...
अस्पताल से घर लौटते वक्त अर्जुन ने मेरा हाथ पूरे रास्ते नहीं छोड़ा।पहले जो आदमी मुझसे दूरी बनाकर रखता ...
गोलियों की आवाज़ अब और करीब आ चुकी थी।मैं डर से कांप रही थी… और अर्जुन के हाथ में ...
मंडप सजा हुआ था। शहनाई की आवाज़ पूरे घर में गूंज रही थी। सबके चेहरों पर खुशी थी… सिवाय ...