r k lal लिखित कथा

रिश्ते में बहस में जीतना

by r k lal
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रिश्ते में बहस में जीतना आर0 के0 लाल सुशील को अपनी बात पर पूरा विश्वास था। वह जानता ...

क्या पुरुष सचमुच अपना ख्याल रखना भूल गए हैं?

by r k lal
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“क्या पुरुष सचमुच अपना ख्याल रखना भूल गए हैं? लेखक: आर. के. लाल अक्सर देखा जाता है कि पुरुष ...

बड़ों को चरण स्पर्श और छोटों को प्यार

by r k lal
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बड़ों को चरण स्पर्श और छोटों को प्यार आर0 के0 लाल आज रमेश के कॉलेज का वार्षिकोत्सव था पूरा ...

दूसरे की बीवी

by r k lal
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दूसरे की बीवी आर0 के0 लाल अशोक ने चहकते हुए अपनी पत्नी उमा को आवाज लगायी, "अजी सुनती हो ...

समय दान

by r k lal
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समय दानआर 0 के0 लाल कितना खुश रहा करते थे शिवानंद। पचपन साल की उम्र होने तक उनके पास ...

मेरी पहली होली

by r k lal
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मेरी पहली होली आर ० के ० लाल ...

सेवा-भाव की अपनी-अपनी सोच

by r k lal
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सेवा-भाव की अपनी-अपनी सोच आर० के० लाल ...

बाबूजी सिखाते सिखाते मर गए मगर....

by r k lal
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बाबूजी सिखाते- सिखाते मर गये मगर......आर 0 के0 लालबाबूजी हमेशा कहा करते थे, “हिम्मते मरदां मददे खुदा”। यह एक ...

खिचड़ी

by r k lal
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खिचड़ीआर 0 के 0 लालमम्मी ! तुम्हारे पापा के घर से इस बार खिचड़ी नहीं आई? सुमित ने अपनी ...

मुंह खुला का खुला रह गया

by r k lal
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मुंह खुला का खुला रह गयाआर 0 के0 लालदीप बहुत ही संस्कारी लड़का था। उसके पापा अदावल उसकी तारीफ ...