Sanjay Kamble लिखित कथा

लबूबू डॉल

by Sanjay Kamble
  • 162

लबूबू डॉल रात के अंधेरे में भी उस बहुत बड़े निर्माण का काम जोरों शोरों से शुरू था। ...

Friday 13

by Sanjay Kamble
  • 417

'Friday 13'पुलिस स्टेशन के भीतर आम दिन की तरह काम चल रहा था। टेबल पर रखे टेलिफोन की घंटी ...

भ्रम जाल

by Sanjay Kamble
  • 414

भ्रम जालऑफिस के वार्षिक समारोह की पार्टी और सहकर्मियों की जिद... लेकिन वह हाथ में शराब का गिलास लेकर ...

Hunted Train Station

by Sanjay Kamble
  • 276

Hunted train stationSanjay Kambleजोर पकड़ चुकी बारिश की बूंदें खिड़की की टूटी जाली से आते हुए कमरे की हवा ...

सायको

by Sanjay Kamble
  • 1.6k

सायकोBy Sanjay Kamble शहरापासून थोडं दूर आपलं पॅसेंजर सोडून शेखरन पुन्हा आपली टॅक्सी शहराच्या ...

रात - एक रहस्य - 7

by Sanjay Kamble
  • (5/5)
  • 11.9k

धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए कमरे के भीतर गया। पूरे कमरे में रोशनी डालते हुए सब कुछ ध्यान से देख ...

रात - एक रहस्य - 6

by Sanjay Kamble
  • (4.8/5)
  • 11k

"क्या बात है यार , मतलब शिकारी खुद ही शिकार बन गया ? साला, अपनी पत्नी की बलि चढ़ाने ...

रात - एक रहस्य - 5

by Sanjay Kamble
  • (4.2/5)
  • 12.6k

वह काफी देर तक मुझे समझाता रहा और मैं चुपचाप मुस्कुराते हुए दोनों को बाय बोलकर अपनी कार से ...

रात - एक रहस्य - 4

by Sanjay Kamble
  • (5/5)
  • 13k

उसने दरवाजे की तरफ देखा तो दरवाजा बंद हो चुका था और बाहर से कोई दरवाजे पर लगातार दस्तक ...

रात - एक रहस्य - 3

by Sanjay Kamble
  • (4.8/5)
  • 12.6k

अगर मैं पानी पीने के लिए उठा और उसी वक्त वो पिशाच आ गया तो मेरे जिस्म के हजारों ...