भाई, मैं तुम्हें सच बता रहा हूँ, अगर उस रात तुम मेरी जगह होते ना, तो शायद डर के ...
जैसी दिखने वाली वो औरत अब भी सामने खड़ी थी। उसके हाथ में पीला सूटकेस था, और उसमें से ...
खट! खट! खट! खट!फर्स्ट क्लास एसी के उस जमे हुए, बर्फीले गलियारे में उन भारी दरवाज़ों के एक साथ ...
इंजन रूम के उस भयानक, धड़कते हुए मांसल कमरे में, जहाँ दीवारों से खून रिस रहा था और हवा ...
दरवाज़े का पुराना, जंग लगा हुआ भारी लॉक मेरे पीछे एक ज़ोरदार 'धड़ाम' की आवाज़ के साथ बंद हुआ। ...
पैंट्री कार के उस घुप्प और बदबूदार अँधेरे में, मेरी साँसें मेरे ही सीने में किसी हथौड़े की तरह ...
छत से लटकता साया और माधव का राजकबीर के हाथ में पकड़े मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी जैसे ...
बंद डिब्बा और खौफनाक दस्तकखिड़की के दोहरे शीशे पर बाहर से दर्जनों हथेलियाँ चिपक चुकी थीं।शीशे के उस पार, ...
"अगर आपकी ट्रेन रात के 11:45 पर किसी ऐसे स्टेशन पर रुक जाए, जो भारत के रेलवे मैप पर ...