Shahroz khan लिखित कथा

अँधेरे वाला स्टेशन - भाग 9

by Shahroz Aslam
  • 1.7k

भाई, मैं तुम्हें सच बता रहा हूँ, अगर उस रात तुम मेरी जगह होते ना, तो शायद डर के ...

अँधेरे वाला स्टेशन - भाग 8

by Shahroz Aslam
  • 1.6k

जैसी दिखने वाली वो औरत अब भी सामने खड़ी थी। उसके हाथ में पीला सूटकेस था, और उसमें से ...

अँधेरे वाला स्टेशन - भाग 7

by Shahroz Aslam
  • 2.3k

खट! खट! खट! खट!फर्स्ट क्लास एसी के उस जमे हुए, बर्फीले गलियारे में उन भारी दरवाज़ों के एक साथ ...

अँधेरे वाला स्टेशन - भाग 6

by Shahroz Aslam
  • 2.4k

इंजन रूम के उस भयानक, धड़कते हुए मांसल कमरे में, जहाँ दीवारों से खून रिस रहा था और हवा ...

अँधेरे वाला स्टेशन - भाग 5

by Shahroz Aslam
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दरवाज़े का पुराना, जंग लगा हुआ भारी लॉक मेरे पीछे एक ज़ोरदार 'धड़ाम' की आवाज़ के साथ बंद हुआ। ...

अँधेरे वाला स्टेशन - भाग 4

by Shahroz Aslam
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पैंट्री कार के उस घुप्प और बदबूदार अँधेरे में, मेरी साँसें मेरे ही सीने में किसी हथौड़े की तरह ...

अँधेरे वाला स्टेशन - भाग 3

by Shahroz Aslam
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छत से लटकता साया और माधव का राजकबीर के हाथ में पकड़े मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी जैसे ...

अँधेरे वाला स्टेशन - भाग 2

by Shahroz Aslam
  • 3.2k

बंद डिब्बा और खौफनाक दस्तकखिड़की के दोहरे शीशे पर बाहर से दर्जनों हथेलियाँ चिपक चुकी थीं।शीशे के उस पार, ...

अँधेरे वाला स्टेशन - भाग 1

by Shahroz Aslam
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​"अगर आपकी ट्रेन रात के 11:45 पर किसी ऐसे स्टेशन पर रुक जाए, जो भारत के रेलवे मैप पर ...