लेखक की कलम से-एक बच्चे की सहज मुस्कान से शुरू होकर वयस्क जीवन के अदृश्य बोझों तक पहुँचता यह ...
घर तो आज भी वही है, पर जिस आँगन में जीवन हँसता-खेलता था, वो आँगन अब न रहा।उस आँगन ...