Sonam Brijwasi लिखित कथा

बिल्ली जो इंसान बनती थी - 6

by Sonam Brijwasi

सुबह की धूप खिड़की से अंदर आ रही थी। शानवी की आँख खुली…लेकिन आज…उसका मन अजीब सा भारी था।जैसे ...

ज़ख्मों की शादी - 4

by Sonam Brijwasi
  • 297

Kabir अकेला लिविंग हॉल में बैठा था। उसकी आंखों में थकान और मन में बेचैनी थी। बाहर अंधेरा और ...

ज़ख्मों की शादी - 3

by Sonam Brijwasi
  • 753

Kabir का घर – आलीशान लेकिन शांत, सुरक्षा के लिहाज़ से पूरी तरह व्यवस्थित। Kabir ने गाड़ी घर के ...

अदृश्य पीया - 14

by Sonam Brijwasi
  • 234

(रात। कमरा शांत है। टेबल पर ग्रंथ खुला है, पास ही कौशिक का चश्मा।)(सुनीति खिड़की के पास खड़ी है। ...

इस घर में प्यार मना है - 14

by Sonam Brijwasi
  • 528

वहीं हवेली जो हमेशा कब्र जैसी खामोश रहती थी—आज चीख़ रही थी। नौकरों की लाइन लगी है ।आँगन में ...

दो पतियों की लाडली पत्नी - 10

by Sonam Brijwasi
  • (0/5)
  • 429

Doctor cabin. Shreya chair पर बैठी है, आँखें बंद, हल्का दर्द अभी भी बना है। Kabir और Karan दोनों ...

बिल्ली जो इंसान बनती थी - 5

by Sonam Brijwasi
  • (4.1/5)
  • 414

सुबह से ही शानवी का मन भारी था। रात वाले सपने ने उसे अंदर तक हिला दिया था। फिर ...

ज़ख्मों की शादी - 2

by Sonam Brijwasi
  • (4.9/5)
  • 960

मंडप, सजावट वही – लाल-सुनहरे फूल, सुनहरी रस्में, शहनाई की हल्की धुन।Shristi की आँखों में आशा की झलक आई ...

अदृश्य पीया - 13

by Sonam Brijwasi
  • 588

(सुबह का समय। घर में सन्नाटा। कौशिक ऑफिस के लिए निकल चुका है—चश्मा लगाए हुए।)(सुनीति दरवाज़े के पास खड़ी ...

इस घर में प्यार मना है - 13

by Sonam Brijwasi
  • 909

गाँव की सीमा। चारों रात भर चलते रहे। पैरों में छाले थे। साँस टूटी हुई थी। सूरज उग चुका ...