Soni shakya लिखित कथा

राधे..प्रेम की अनोखी दास्तां (सीज़न 2) - 2

by Soni shakya
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तभी ऑफिस में देव के सर आ जाते हैं।बॉस के आते ही देव उनसे मिलने जाता है।क्या मैं अंदर ...

राधे ..... प्रेम की अंगुठी दास्तां - 15

by Soni shakya
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राधा अपने आप से ऐसे बात कर रही थी जैसे देव सामने बैठकर उत्तर दे रहा हो ।राधा को ...

राधे..प्रेम की अनोखी दास्तां (सीज़न 2) - 1

by Soni shakya
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इस शाम की तरह जिंदगी भी ढल रही थी राधा की....शाम के 4:00 रहे थे, राधा अपने कमरे से ...

मां... हमारे अस्तित्व की पहचान - 6

by Soni shakya
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चिड़िया दोबारा आती है और आसु के करीब से पंख फड़फड़ाते हुए निकल जाती है और सामने डाल पर ...

मां... हमारे अस्तित्व की पहचान - 5

by Soni shakya
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चिड़िया अपने बच्चों की चोंच से चोंच मिला रही थी। जैसे कह रही हो कि--बेटा आज जो तुम स्वस्थ ...

मां... हमारे अस्तित्व की पहचान - 4

by Soni shakya
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आशु 2 घंटे बीत चुके हैं चिड़िया अभी तक नहीं आई।भावना बोली -चलो आशु , यु ट्यूब पर देखते ...

मां... हमारे अस्तित्व की पहचान - 3

by Soni shakya
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अगले दिन...भावना जैसे ही गेट खोलकर बरांडे में गई तो वहां का मंजर देखते ही उसका दिल जोर से ...

मां... हमारे अस्तित्व की पहचान - 2

by Soni shakya
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कुछ दिनों बाद...एक सुबह जैसे ही प्रियु ने बरांडे का गेट खोला।उसे चू चू की आवाज सुनाई दी, सुनते ...

मां... हमारे अस्तित्व की पहचान - 1

by Soni shakya
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*मां*एक ऐसा शब्द जो अपने आप में ही सम्पूर्ण हे इसे समझने के लिए किसी और शब्द की जरूरत ...

राधे ..... प्रेम की अंगुठी दास्तां - 13

by Soni shakya
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23 साल बाद..आज अपने ही शहर में फिर एक बारदोनों का सामना हो गया।देखते ही देव बोला ..कैसी हो ...