बांद्रा स्टेशन का वो अंतहीन और भारी शोर, हवा में घुली सिगरेट के धुएँ की महक, और बिना रुके ...
गर्मियों की वो झुलसा देने वाली दोपहर थी। आसमान से जैसे अंगारे बरस रहे थे और गाँव की गलियों ...
प्लेटफार्म नंबर चार पर जैसे मौत का सन्नाटा पसरा हुआ था। दिसंबर की सर्द रात, और उस पर कोहरे ...
शहर की चकाचौंध से दूर, एक सुंदर और करीने से बने आधुनिक घर के भीतर—जहाँ दीवारों पर सफेदी और ...
(नदी के उस गीले और कीचड़ भरे किनारे पर जहाँ सरकंडों और घने पेड़ों का झुंड पानी के करीब ...
(पानी की उस ठंडी और असीम गहराइयों में, जहाँ सूरज की किरणें भी मुश्किल से पहुँच पा रही थीं, ...
(आसमान के सीने पर गरजते हुए उस काले हेलीकॉप्टर ने जब अगला पैंतरा बदला, तो हवा में मौत का ...
(आसमान की छह-सात सौ फीट की बुलंदी पर मौत की रफ्तार से चीखती हुई वह पर्पल कार किसी उबलती ...
(आसमान की छह-सात सौ फीट की बुलंदी पर सन्नाटे को चीरती हुई वह पर्पल कनवर्टिबल कार अभी-अभी अपनी ही ...
(बादलों के बीच छह-सात सौ फीट की बुलंदी पर खामोश तैरती उस हाई-टेक पर्पल कार के कैबिन में गहरा ...