उषा जरवाल लिखित कथा

संघर्ष और पहचान : एक शिक्षिका की कहानी

by उषा जरवाल
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खिड़की के उस पार आसमान में बादल घिर आए थे। सीमा जी किताबों से भरी अलमारी के सामने खड़ी ...

रोबोट माँ

by उषा जरवाल
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सुबह के चार बजे थे। घर गहरी नींद में डूबा हुआ था, पर उसके भीतर की चेतना पहले ही ...

दशानन की पीड़ा

by उषा जरवाल
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लंका का आकाश धुएँ से भर चुका था। अशोक वाटिका जलकर राख हो रही थी, और हवाओं में जलते ...

पीहर

by उषा जरवाल
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माँ से मायका .... पिता से पीहर, और भी न जाने कितने ही नाम हैं – बाबुल के आँगन ...

विचित्र संख्या

by उषा जरवाल
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भारत विश्वगुरु कहलाता था | आध्यात्म, शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान कोई भी क्षेत्र हो भारत हर क्षेत्र में अग्रणी ही ...

स्वप्न बसेरा ... हुआ मेरा

by उषा जरवाल
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दो साल पहले की बात है, जब हमने गुरुग्राम में अपना नया घर लिया था | हमारा बजट अधिकतम ...

मैं तुलसी तेरे आँगन की

by उषा जरवाल
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कुछ दिन पहले मुझे 10 – 15 दिनों के लिए मुझे अपने घर से कहीं बाहर जाना पड़ा | ...

हर सास की एक ही आस - सर्वगुण संपन्न बहू

by उषा जरवाल
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शहर के बाज़ार में एक बहुत बड़ी इमारत थी, उसमें एक भव्य समारोह का आयोजन किया था | जिस ...

शिकंजी - सी ज़िंदगी

by उषा जरवाल
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एक बार एकआचार्य जीकक्षा में पढ़ा रहे थे | कक्षा के सभी छात्र रुचिपूर्वक उन्हें सुन रहे थे और ...

जीते जी श्राद्ध ?

by उषा जरवाल
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कई दिनों से घर में जोर – शोर से तैयारियाँ चल रही थी | माँ – पिताजी की 50वीं ...