थोड़ी देर बाद। शहर के बाहर एक बियाबान इलाका। गाड़ी की हाई-बीम लाइट में एक चौकोर गड्ढा खोदा जा ...
सुबह का समय था। एक दुबला-पतला युवक थाने की ओर जा रहा था। हाथ में स्टील की केतली और ...
संभावित सिंह सामने तनकर खड़ा था। चेहरे के एक तरफ़ जले के पुराने निशान — दाग़दार, चकत्तों जैसे उभरे ...
छोटा कमरा। कैमरा ट्राइपॉड पर। लाइट तीखी। कोई एंकर नहीं। कोई डिबेट नहीं। बस सीधा कैमरा। वर्षा कुर्सी पर ...
वर्षा पेन को मेज़ पर टिक-टिक कर रही थी। एक ही रिदम। नसों में उतरती हुई। सौना की बात ...
शहर की सड़कें चौड़ी थीं। पेड़ों की कतारें। साफ़ फुटपाथ। ऊँची दीवारों के पीछे खामोश बंगले। वर्षा की टैक्सी ...
मकान का पिछला बरामदा छोटा था। ढके हुए कूलर। पुराने एसी के आउटडोर यूनिट। टूटे गमले। अनीश ने सिक्योरिटी ...
अनीश के जबड़े कस गए थे। दाँत ऐसे भींचे जैसे टूट जाएँगे। “ये विग वाला हरामी… राज लढवान… इसका ...
जोगी नीचे चला गया था बाइक निकालने। वर्षा ने जल्दी-जल्दी सामान समेटा। एक बार कमरे को देखा। बिस्तर। कुर्सी ...
अगली सुबह। नदी के किनारे हल्की धूप उतर रही थी। दूर झाड़ियों के पास जोगी की मोटरसाइकिल खड़ी थी। ...