Vijay Erry लिखित कथा

छुट्टियों का आनंद

by Vijay Erry
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छुट्टियों का आनंदगर्मी की छुट्टियाँ शुरू होते ही स्कूल का माहौल पूरी तरह बदल गया था। आखिरी घंटी बजते ...

वास्तविक चाबी

by Vijay Erry
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वास्तविक चाबीरामपुर की पुरानी हवेली में समय जैसे ठहर गया था। मोटी दीवारें, लकड़ी की नक्काशीदार छतें, आँगन में ...

श्मशान का रहस्य

by Vijay Erry
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श्मशान का रहस्य लेखक: विजय शर्मा एरी रात का अँधेरा गाँव के ऊपर इतना ...

पुरानी ईमारत

by Vijay Erry
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पुरानी इमारतलेखक: विजय शर्मा एरीशहर के किनारे, जहाँ नई इमारतें आसमान छूने की होड़ में थीं, एक पुरानी इमारत ...

CCTV फुटेज

by Vijay Erry
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सीसीटीवी फुटेजलेखक: विजय शर्मा एरीशहर की हलचल भरी रातों में भी कुछ जगहें ऐसी होती हैं जहाँ सन्नाटा गूंजता ...

कैन्टीन की यादें

by Vijay Erry
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कैन्टीन की यादेंलेखक: विजय शर्मा एर्रीस्कूल की घंटी बजते ही पूरा मैदान बच्चों से भर जाता था। एक तरफ ...

घर की राह

by Vijay Erry
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घर का राहलेखक: विजय शर्मा एरीशहर की चकाचौंध में खोया हुआ एक युवक था—अर्जुन। दिल्ली की ऊँची इमारतों, तेज़ ...

मेरा घर

by Vijay Erry
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मेरा घर लेखक: विजय शर्मा एर्रीगाँव की धूल भरी पगडंडी पर चलते हुए जब मैंने पहली बार उस छोटे ...

स्कूल का पहला दिन

by Vijay Erry
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विजय शर्मा एरी अजनाला, अमृतसर स्कूल का पहला दिन सुबह की ...

अंधेरे में कोई है

by Vijay Erry
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अंधेरे में कोई है लेखक: विजय शर्मा एरी (Vijay Sharma Erry)रात के बारह बज चुके थे। शहर की ...