भाग – 7जब बदनामी ने दरवाज़ा खटखटायासमाज जब हारने लगता है,तो वह सच से नहीं,बदनामी से हमला करता है।अगली ...
भाग – 6सुबह की धूप आँगन में उतर रही थी,लेकिन घर के अंदर एक अजीब सा सन्नाटा छाया हुआ ...
भाग – 5माँ के फैसले के बाद सब कुछ बाहर से सामान्य दिख रहा था,लेकिन अंदर ही अंदर हर ...
भाग – 4गाँव की बस सुबह-सुबह शहर पहुँची।अंकित प्लेटफॉर्म पर खड़ा था, दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।उसे पता ...
भाग -3बारिश के बाद की सुबह कुछ ज़्यादा ही खामोश थी।मंदिर के सामने वही जगह, वही फूलों की खुशबू—लेकिन ...
भाग – 2उस रात अंकित देर तक सो नहीं पाया।कमरे की बत्ती बंद थी, लेकिन दिमाग़ में सवालों ...
part - 1सुबह के छह बज रहे थे।शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन अंकित की ज़िंदगी में ...
Part - 4 लास्ट पार्टसुबह की हवा में हल्की ठंडक थी, लेकिन सयुग के भीतर अजीब सी तपिश थी।रात ...
part - 3दिल्ली की रातें अब सयुग को डराती नहीं थीं। पहले जिन सड़कों पर चलते हुए उसे अपने ...
PART–2दिल्ली की सुबह गाँव की सुबह जैसी नहीं होती। यहाँ सूरज निकलने से पहले ही शोर शुरू हो जाता ...