राज बोहरे लिखित कथा

बंटवारा

by राज बोहरे
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कहानी बंटवारा "ममा ये कैसा खाना है?हमसे नहीं खाया जा रहा।" रीशु झुंझला कर कहा तो झेंपती हुई ...

आषाढ़ पूजा

by राज बोहरे
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कहानी- आषाढ़ पूजा 'सुनो दिव्या आज हम सब माता वाली टेकरी पर चल रहे हैं। अपने गांव के लोग ...

शेष सम्बंध

by राज बोहरे
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कहानी-शेष सबंध बरसों बाद विशाखा मायके जाने के लिए अकेली ट्रेन का सफर कर रही थी। अपनी वर्थ ...

तक़लीफ़

by राज बोहरे
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तक़लीफ़ दोपहर की धूप अपनी पूरी तल्खी के साथ शहर की पुरानी सिविल लाइन की मंत्री निवास की बिल्डिंग ...

गुनाह

by राज बोहरे
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New गुनाह अध्याय 1 देवी मंदिर की सीढ़ियाँ उतरती निर्मला डगमगा रही थी। आँखों के आगे जैसे पूरा आकाश ...

नई शुरुआत

by राज बोहरे
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कहानी – नई शुरुआत कस्बे के पुराने मोहल्ले में एक मकान था—लाल ईंटों से बना, जिसके बरामदे में ...

नई राह

by राज बोहरे
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New नई राह मसूरी की पहाड़ियों पर हल्की धुंध तैर रही थी। सुबह का समय था, लेकिन ठंड में ...

पहचान

by राज बोहरे
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New पहचान सांझ ढल चुकी थी। गाँव के कच्चे रास्तों पर धूल बैठने लगी थी और आकाश में लालिमा ...

रील का नशा

by राज बोहरे
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कहानी ...

तंत्र के मख़ौल का जवाब-हल्ला

by राज बोहरे
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समीक्षा तंत्र के मख़ौल का जवाब- “हल्ला” रामभरोसे मिश्रा राजनारायण बोहरे का नया कहा